मुरादाबाद : मुरादाबाद के बहुचर्चित 15 साल पुराने मैनाठेर कांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा हमले के मामले में सुनाई गई है। शनिवार को एडीजे-दो कृष्ण कुमार की अदालत ने सजा पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह अहम फैसला सुनाया।
इससे पहले 23 मार्च को अदालत ने सभी 16 आरोपियों को दोषी करार दिया था। सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सभी दोषियों को पुलिस हिरासत में कोर्ट में पेश किया गया। जैसे ही अदालत ने सजा सुनाई, वहां मौजूद परिजन सन्न रह गए और माहौल भावुक हो गया।
यह मामला 6 जुलाई 2011 का है, जब मुरादाबाद के मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस एक आरोपी की तलाश में दबिश देने पहुंची थी। इसी दौरान धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विरोध उग्र हो गया और मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
गुस्साई भीड़ ने मुरादाबाद-संभल रोड पर तीन अलग-अलग स्थानों पर जाम लगा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ ने मैनाठेर थाने और डींगरपुर पुलिस चौकी में आग लगा दी। पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलने पर तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार और जिलाधिकारी राजशेखर मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ ने उन्हें भी घेर लिया। इस दौरान डीआईजी अशोक कुमार पर जानलेवा हमला किया गया और उनकी पिस्टल तक छीन ली गई थी। यह घटना उस समय प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गई थी।
इस मामले में पीआरओ रवि कुमार की तहरीर पर 33 नामजद और करीब 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इनमें से 6 आरोपी नाबालिग पाए गए, जिनकी फाइल किशोर न्यायालय भेज दी गई थी। लंबी सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई जारी रही। करीब 15 साल बाद अब इस मामले में फैसला आया है, जिसे न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
इस फैसले के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और गंभीर अपराधों में देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलता है। पुलिस और प्रशासन के लिए भी यह मामला एक बड़ी सीख के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया था।
