लखनऊ : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों, गिरते रुपये, लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक-आर्थिक हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई। मायावती ने कहा कि घुसपैठ करने वाले विदेशियों की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करना उचित है, लेकिन इसके नाम पर करीब 100 करोड़ भारतीयों को दस्तावेजी जंजाल में फंसाना सही नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और व्यावहारिकता के साथ विचार करे, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
बसपा सुप्रीमो ने देश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए रुपये की लगातार गिरती कीमत पर गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि दुनिया के अप्रत्याशित रूप से बदलते हालात के बीच यह आत्ममंथन जरूरी है कि भारत की स्थिति कितनी स्थिर, मजबूत और सुरक्षित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या रुपया एक डॉलर के मुकाबले 100 तक पहुंचने के बाद ही रुकेगा? सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
मायावती ने अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए कहा कि केवल पड़ोसी देशों में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में तेजी से राजनीतिक और सामाजिक बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय लोकतंत्र और संविधान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश को आत्मनिर्भर बनाने और जनता की उम्मीदों को मजबूत करने के लिए गंभीर और सार्थक प्रयास जारी रखने चाहिए।
धर्म परिवर्तन कानून को लेकर भी मायावती ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कड़े कानून और तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद यदि धर्म परिवर्तन की घटनाएं नहीं रुक रही हैं, तो इसका मतलब है कि मूल समस्या की पहचान नहीं हो पा रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जड़ तक जाकर इस समस्या का समाधान करे और इसकी आड़ में होने वाली विभाजनकारी राजनीति और हिंसा पर तुरंत रोक लगाए।
अपने बयान के अंत में बसपा प्रमुख ने देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जातिवाद और सांप्रदायिकता के कारण बहुजन समाज के लोगों के बीच सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है। इससे आम जनता के जीवन स्तर में गिरावट आ रही है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनता जा रहा है। मायावती ने कहा कि बसपा इन सभी मुद्दों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और देश में संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
