नई दिल्ली : देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और भव्यता के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी को भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिहाज से एक अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों यूरोपीय नेताओं के साथ तस्वीरें साझा करते हुए भारत-ईयू साझेदारी को मजबूत और भरोसेमंद बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के नेताओं की मौजूदगी भारत और यूरोप के बीच साझा मूल्यों, लोकतंत्र और सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देगी।
पीएम मोदी ने परेड की तस्वीरें साझा करते हुए भारत की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य क्षमताओं की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि गणतंत्र दिवस परेड में भारत की तैयारी, तकनीकी दक्षता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अटूट संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल देश का गौरव हैं और उनकी क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं।
कर्तव्य पथ पर आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, विदेशी राजनयिक और बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। यूरोपीय संघ के दोनों नेताओं ने सैन्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखा और भारत की विविधता व अनुशासन की सराहना की।
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने हैं। 27 देशों के इस संगठन के प्रतिनिधि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम शिखर वार्ता करेंगे। इस बैठक में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते, रणनीतिक रक्षा साझेदारी और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत आने से पहले संकेत दिए थे कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अब अंतिम चरण में है। ऐसे में यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
