नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के नवीनतम संस्करण में देशवासियों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर काफी हलचल भरा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी के कारण लंबे समय तक अनेक कठिनाइयों से गुजरी थी और सभी को उम्मीद थी कि इस संकट से निकलने के बाद दुनिया फिर से प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ेगी, लेकिन इसके विपरीत अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की स्थितियाँ लगातार बनती जा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में “ज्ञान भारतम सर्वे” का विशेष उल्लेख करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल देशवासियों की जनभागीदारी की भावना को दर्शाती है और इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों के बारे में जानकारी एकत्र करना है। उन्होंने बताया कि इस सर्वे से जुड़ने के लिए “ज्ञान भारतम ऐप” एक प्रमुख माध्यम है, जिसके जरिए लोग अपने पास मौजूद पांडुलिपियों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारी साझा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर एंट्री की पुष्टि की जा रही है, ताकि सही और प्रमाणिक जानकारी ही संग्रहित की जा सके।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि अब तक हजारों लोगों ने इस अभियान में भाग लेते हुए अपनी पांडुलिपियाँ साझा की हैं। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से मिले उदाहरणों का जिक्र करते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश के नामसाई से ताई लिपि में पांडुलिपियाँ साझा की गई हैं, वहीं अमृतसर से गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपियाँ प्राप्त हुई हैं, जो सिख परंपरा और पंजाबी भाषा की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं। इसके अलावा कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों पर लिखी प्राचीन पांडुलिपियाँ उपलब्ध कराई हैं, जबकि राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने ताम्रपत्रों पर लिखे दुर्लभ दस्तावेज साझा किए हैं। लद्दाख की हेमिस मोनेस्ट्री से तिब्बती भाषा में महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की जानकारी भी इस अभियान के तहत सामने आई है। उन्होंने कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और देशभर में इस तरह की अनमोल धरोहर बड़ी संख्या में मौजूद है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़े ऐसे पहलुओं को सामने लाकर इस अभियान को और मजबूत बनाएं। यह सर्वे जून के मध्य तक जारी रहेगा।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में संघर्ष चल रहा है, वह ऊर्जा संसाधनों का बड़ा केंद्र है, जिसके कारण पेट्रोल और डीजल को लेकर वैश्विक स्तर पर संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने मजबूत वैश्विक संबंधों, विभिन्न देशों से मिल रहे सहयोग और पिछले एक दशक में विकसित हुई क्षमता के आधार पर इन चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में देशवासियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा है और इसमें स्वार्थ की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अफवाह फैलाने वालों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की गलत सूचनाएं देश को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी तरह की अफवाहों के बहकावे में न आने की अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल सरकार द्वारा दी जा रही आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए और उसी के आधार पर कोई निर्णय लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने विदेशों में रह रहे भारतीयों का भी जिक्र किया और खासतौर पर खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वहां एक करोड़ से अधिक भारतीय कार्यरत हैं और इन देशों द्वारा उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि जिस तरह देशवासियों ने पहले भी कई कठिन परिस्थितियों का सामना एकजुट होकर किया है, उसी तरह इस बार भी देश मजबूती से उभरेगा। उन्होंने कहा कि देश की ताकत उसकी जनता में निहित है और जब 140 करोड़ लोग एक साथ खड़े होते हैं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं रहती।
