साजिश और हिंसा बेहद संगीन!MP-MLA कोर्ट का रुख कड़ा, 10+ मुकदमे, 100 से ज्यादा गिरफ्तार
बरेली : यूपी के बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए बवाल और हिंसा के मामले में मौलाना तौकीर रज़ा को बड़ा झटका लगा है। फतेहगढ़ जेल में बंद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जमानत अर्जी एमपी-एमएलए कोर्ट ने खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश अमृता शुक्ला की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि “यह मामला केवल भीड़ का नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने का है।”
अदालत ने क्यों ठुकराई जमानत?

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी की भूमिका सिर्फ मौके पर मौजूद रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के तहत हिंसा को अंजाम दिया गया कोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर है। शहर की अमन-ओ-अमान और पब्लिक ऑर्डर को खतरा पहुंचा है इसी आधार पर मौलाना तौकीर रज़ा और उनके सहयोगी रेहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई
क्या हुआ था 26 सितंबर को?

अभियोजन के अनुसार जुमे की नमाज़ के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में बड़ी भीड़ इकट्ठा हुई। इसके बाद शहर के अलग -अलग इलाकों में हिंसक बवाल, फसाद और अफरा-तफरी फैल गई इल्ज़ाम है कि पुलिस पर 10 से ज्यादा जगहों पर पथराव किया गया। अवैध हथियारों से फायरिंग की गई। कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दी गई। जिसके चलते कोतवाली में तैनात एसआई राजीव कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक कुमार टाकीज के पास उग्र भीड़ ने पुलिस बल पर हमला किया
केस से जुड़ी अहम जानकारी
इस मामले में 27 सितंबर 2025, को मौलाना तौकीर रजा की गिरफ्तारी की गई। इसमें 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। 7 मामलों में खुद मौलाना नामजद हैं। इसमें मुख्य आरोप है कि बलवा (दंगा), हत्या का प्रयास, भीड़ को भड़काना, अवैध हथियारों से हमला, पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 17 से अधिक आपराधिक मामले उनके खिलाफ दर्ज बताए गए हैं। इस मामले में 105 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी अब तक हो चुकी है
कई बार खारिज हो चुकीं है जमानत
यह पहला मौका नहीं है जब मौलाना तौकीर रज़ा को अदालत से राहत नहीं मिली हो। इससे पहले भी हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। जिससे साफ है कि कानूनी मोर्चे पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस फैसले को एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि भीड़ की आड़ में हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।कानून -व्यवस्था से खिलवाड़ करने पर सख्त कार्रवाई तय है। “कानून की नजर में न कोई बड़ा, न कोई छोटा, सब बराबर हैं।”
