लखनऊ : विकासनगर सेक्टर-12 रिंग रोड किनारे बनी अवैध बस्ती में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने दिल दहला देने वाली तस्वीर पेश कर दी। इस अग्निकांड में लापता छह बच्चों में से दो मासूम आयुषी और स्वाती की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य बच्चों की तलाश अभी भी जारी है। इस दर्दनाक खबर के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
बुधवार शाम करीब पांच बजे अचानक एक झोपड़ी में आग लगने से शुरू हुई यह घटना देखते ही देखते विकराल रूप ले गई। आग इतनी तेजी से फैली कि करीब 1200 झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। झोपड़ियों में रखे करीब 100 गैस सिलिंडर भी एक-एक कर फटने लगे, जिससे आग और भी भयावह हो गई। चारों तरफ धुएं का गुबार और आग की लपटें उठती नजर आईं।
आग लगते ही बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे। सड़क पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, आसपास की दुकानों के शटर गिर गए और ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल कर्मियों ने हालात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और 22 दमकल की गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 10 बजे आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक बस्ती का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था।
इस भीषण हादसे में दो परिवारों के कुल छह बच्चे लापता हो गए थे, जिनमें से दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बाकी बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आसपास के इलाकों और मोहल्लों में भी बच्चों की खोजबीन की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के तुरंत बाद पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल नहीं लग सकी। जब सूचना दी गई, तब भी पुलिस और दमकल की गाड़ियां करीब एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंचीं, जिसके चलते आग ने विकराल रूप ले लिया।
घटना से गुस्साए लोगों ने मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी की। लोगों का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था। बताया जा रहा है कि मिनी स्टेडियम के पास करीब तीन बीघा खाली जमीन पर वर्षों से यह बस्ती बसी हुई थी, जहां लोग झोपड़ियां बनाकर रह रहे थे। आग में 50 के करीब मवेशियों के जिंदा जलने की भी सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
फिलहाल प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है, वहीं इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में अवैध बस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
