लखनऊ : नगर निगम में लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच आखिरकार रविवार को सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के सख्त आदेश के बाद मेयर सुषमा खर्कवाल ने यह प्रक्रिया पूरी कराई। इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा रही।
कोर्ट ने मेयर के अधिकार किए थे सीज
दरअसल, हाई कोर्ट ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए कहा था कि 29 मई तक सपा पार्षद को शपथ दिलाई जाए। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न होने पर मेयर सुषमा खर्कवाल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ेगा और निजी हलफनामा भी दाखिल करना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने मेयर के अधिकार भी सीज कर दिए थे, जिसके बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया।
अस्पताल से लौटते ही मेयर ने निभाया आदेश
मेयर सुषमा खर्कवाल ने बताया था कि वह स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती थीं। शनिवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने रविवार सुबह सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने की जानकारी दी। इसके बाद नगर निगम कार्यालय में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने के बाद बदला मामला
यह पूरा विवाद नगर निकाय चुनाव 2023 से जुड़ा हुआ है। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज-3 से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने चुनाव जीता था। बाद में सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने शपथ पत्र में शादी को लेकर गलत जानकारी दी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करते हुए दूसरे स्थान पर रहे ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित कर दिया था।
