नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में पिछले करीब दो महीनों से एक भी गवाह की गवाही नहीं हो पाना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब करते हुए ट्रायल कोर्ट को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि गवाह अदालत में पेश क्यों नहीं हो रहे हैं और ट्रायल में लगातार देरी क्यों हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में न्याय में देरी का सीधा असर न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है। खासकर जब मामला इतना बड़ा और संवेदनशील हो, जिसमें कई लोगों की जान गई हो, तब ट्रायल को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश को निर्देश दिया कि कानून के तहत जरूरी कदम उठाकर गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और ट्रायल की प्रगति को लेकर नई स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए। अदालत ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में भी सुनवाई की रफ्तार धीमी रही तो वह इस मामले में और सख्त रुख अपना सकती है।
दरअसल यह पूरा मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दिन किसान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पैतृक क्षेत्र में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच एक एसयूवी वाहन घुस गया, जिससे चार किसानों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद इलाके में हालात बेकाबू हो गए थे। गुस्साए किसानों और स्थानीय लोगों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस दौरान वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी जान चली गई थी। इस तरह पूरे घटनाक्रम में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी, जिससे देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मच गई थी।
इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि जिस वाहन से किसानों को कुचला गया, उसमें आशीष मिश्रा मौजूद थे। हालांकि आशीष मिश्रा ने शुरू से ही खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया है। लंबी जांच और पूछताछ के बाद दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर ट्रायल को तेज करने का दबाव बढ़ गया है। वहीं पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और उन्हें न्याय मिल सकेगा।
