कानपुर : हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे के मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा को बुधवार को अदालत से बड़ी राहत मिल गई। वकीलों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और अदालती कार्यों के बहिष्कार के बीच हुई विशेष सुनवाई में कोर्ट ने शिवम मिश्रा की जमानत मंजूर कर ली। इतना ही नहीं, पुलिस द्वारा मांगी गई रिमांड अर्जी को भी अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया।
बुधवार को कानपुर कचहरी में वकीलों की हड़ताल के चलते पूरे परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। अधिकांश अदालतों में कामकाज ठप रहा, लेकिन शिवम मिश्रा के मामले को लेकर विशेष सुनवाई की गई। यह मामला पहले से ही हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है, क्योंकि आरोपी पर लग्ज़री कार लैंबॉर्गिनी से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की। पुलिस का तर्क था कि मामले की विवेचना के लिए शिवम मिश्रा की कस्टडी आवश्यक है। हालांकि अदालत ने पुलिस के तर्कों को आधारहीन मानते हुए रिमांड अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना था कि अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है, जिससे रिमांड जरूरी हो।
इसके बाद अदालत ने आरोपी शिवम मिश्रा को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया। जमानत देते समय कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा और जब भी पुलिस पूछताछ के लिए बुलाएगी, उसे उपस्थित रहना होगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जमानत का मतलब यह नहीं है कि आरोपी जांच से बच सकता है।
गौरतलब है कि इस मामले में लगी धाराएं सात साल से कम सजा वाली बताई जा रही थीं, जिसको लेकर पहले से ही जमानत की संभावना जताई जा रही थी। बार एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों ने भी सवाल उठाए थे कि ऐसे मामलों में पुलिस स्तर पर ही बेल दिए जाने का प्रावधान है, फिर आरोपी को न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा गया।
जमानत मिलने के बाद आरोपी की रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही शिवम मिश्रा को जेल से रिहा कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि जमानत के बावजूद जांच जारी रहेगी और सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जाएगी। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कानपुर समेत प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि विवेचना के दौरान क्या नए तथ्य सामने आते हैं और अदालत में अगली सुनवाई में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है। मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर की जाएगी।
