इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश से जुड़ी एक अहम कानूनी खबर सामने आई है, जहां दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया है। मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई, जहां अदालत ने प्रथम दृष्टया परिस्थितियों को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम संरक्षण अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश के बाद फिलहाल शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। यह मामला नाबालिगों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद शंकराचार्य और उनके शिष्य ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
अदालत में सरकार और बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट आना उचित नहीं है और इसके लिए निचली अदालत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला भी दिया गया। वहीं, शंकराचार्य के अधिवक्ता ने सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट न आया जाए। इस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं माना जा सकता।
बचाव पक्ष ने जांच पर उठाए गंभीर सवाल
शंकराचार्य के वकील ने पूरे मामले को साजिश करार देते हुए कहा कि पहले 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन मारपीट की शिकायत दी गई थी। जब उस पर मामला दर्ज नहीं हुआ, तो बाद में पॉक्सो एक्ट के तहत आवेदन दाखिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों शिकायतें आपस में विरोधाभासी हैं, जिससे मामले की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केस दर्ज कराने वाला व्यक्ति स्वयं हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर गौहत्या, दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज हैं और वह 25 हजार रुपये का इनामी भी बताया गया है। इसके साथ ही यह सवाल उठाया गया कि नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति के समक्ष सही तरीके से क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया और उनके माता-पिता कहां हैं।
शंकराचार्य का बयान और अगली सुनवाई
सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और “झूठ की कलई कोर्ट में खुल जाएगी।” उन्होंने सवाल उठाया कि बच्चों के साथ कथित कुकर्म की मेडिकल रिपोर्ट किसकी है और अपराध किसने किया है, यह साबित करना जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है। यह मामला न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में सूचीबद्ध है और शंकराचार्य व उनके शिष्य की अग्रिम जमानत अर्जी पर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से उन्हें बड़ी राहत मिली है, जबकि पूरे मामले पर सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
