नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो के ऑपरेशन में लगातार पांचवें दिन भी कोई सुधार देखने को नहीं मिला। शनिवार को देश के कई एयरपोर्ट से लगभग 350 फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े एयरपोर्ट पर रातभर यात्रियों की लंबी कतारें और नाराजगी का आलम देखा गया। पिछले चार दिनों में रद्द उड़ानों की संख्या 2,000 से ज्यादा हो चुकी है, जबकि रोजाना औसतन 500 फ्लाइट्स लेट हो रही हैं।
इंडिगो ने इस पर कहा है कि फ्लाइट ऑपरेशन पूरी तरह सामान्य होने में 15 दिसंबर तक का समय लग सकता है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पायलट और क्रू मेंबर्स की कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। वहीं, सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू ने कहा कि नए FDTL नियम 1 नवंबर से लागू किए गए हैं, लेकिन किसी अन्य एयरलाइन को इस नियम के कारण परेशानी नहीं हुई। इसका मतलब साफ है कि इंडिगो के संचालन में आई यह समस्या कंपनी की लापरवाही और तैयारी में कमी की वजह से है। मिनिस्टर ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने इंडिगो को अस्थायी राहत दी है। DGCA ने बताया कि एयरलाइन को अब 10 फरवरी 2026 तक वीकली रेस्ट के बदले छुट्टी देने का निर्णय स्थगित करने की अनुमति दी गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फ्लाइट ऑपरेशन में बाधा कम से कम आए और यात्रियों की परेशानियों को कुछ हद तक कम किया जा सके।
DGCA ने 1 नवंबर से पायलट और क्रू मेंबर्स के कामकाज के नियमों में बदलाव किया है। इसे फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL कहा जाता है। नए नियमों के अनुसार पायलट और क्रू मेंबर्स को पर्याप्त आराम देना अनिवार्य है ताकि वे थके हुए या ओवरवर्क स्थिति में उड़ान न भरें और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। पहले चरण में यह नियम 1 जुलाई से लागू हुआ था, जबकि दूसरा चरण 1 नवंबर से लागू किया गया। नए नियमों के कारण इंडिगो के पास पर्याप्त पायलट और क्रू मेंबर्स की उपलब्धता में कमी आई है, और इसी वजह से फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हुआ है।
यात्रियों ने एयरपोर्ट पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कई लोग अपने परिवार और काम के लिए समय पर पहुंचने में विफल रहे। एयरलाइन के कर्मचारियों ने यात्रियों को रूटीन अपडेट देने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर नजर आई। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए DGCA के बदलाव जरूरी थे, लेकिन इंडिगो ने अपने संचालन में इस बदलाव का प्रभाव सही तरीके से मैनेज नहीं किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइन कंपनियों को नए नियमों के अनुसार अपनी फ्लाइट शेड्यूलिंग और क्रू मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पायलट और क्रू मेंबर्स की कमी केवल इंडिगो के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हवाई यातायात के लिए जोखिम बन सकती है। वहीं, यात्री भी एयरलाइन की लापरवाही और नियोजन की कमियों से सीधे प्रभावित हुए हैं।
इंडिगो का यह संकट यह दिखाता है कि सुरक्षा नियमों को लागू करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ एयरलाइन को अपनी संचालन क्षमता और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना हर एयरलाइन का प्रमुख कर्तव्य है। फिलहाल यात्रियों को इंडिगो फ्लाइट्स के रूटीन सामान्य होने तक धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है, और DGCA लगातार इस स्थिति पर निगरानी रख रहा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से नियमों में बदलाव जरूरी था, लेकिन इंडिगो के संचालन में आई यह बाधा आम जनता के लिए चुनौती बन गई है। एयरलाइन और नियामक एजेंसियों दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि भविष्य में इस तरह की समस्याओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
