नई दिल्ली : केंद्र की सत्ताधारी एनडीए सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के साझा मंच INDIA गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक आज नई दिल्ली के संविधान क्लब में होने जा रही है। करीब दो साल बाद आयोजित हो रही इस बैठक पर देशभर की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में विपक्षी दल आगामी राजनीतिक रणनीति, केंद्र सरकार के खिलाफ साझा अभियान और हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर चर्चा करेंगे। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना यूबीटी, एनसीपी शरद पवार गुट, सीपीएम, सीपीआई समेत कुल 23 राजनीतिक दलों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। विपक्षी दलों का दावा है कि वे केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट हैं और लोकतंत्र, संविधान, रोजगार तथा महंगाई जैसे मुद्दों पर संयुक्त रूप से आवाज उठाते रहेंगे।
दो साल बाद INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक, विपक्षी एकता पर सबकी नजर
हालांकि बैठक से पहले ही गठबंधन के भीतर मतभेदों की खबरें भी सामने आने लगी हैं। खास तौर पर तमिलनाडु की राजनीति को लेकर कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती नाराजगी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है। बताया जा रहा है कि डीएमके ने इस बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है, जिससे विपक्षी एकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच भाजपा नेताओं ने भी INDIA गठबंधन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और भाजपा नेता दिलीप घोष ने बैठक से पहले विपक्षी गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि INDIA गठबंधन अब लगभग अस्तित्वहीन हो चुका है और उसके सहयोगी दलों के बीच गहरे मतभेद सामने आ चुके हैं। दिलीप घोष ने कहा कि पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी INDIA गठबंधन की बैठकों में हिस्सा नहीं लेती थीं, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें बैठक में शामिल होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो चुकी है और पार्टी के कई नेता तथा जनप्रतिनिधि सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे हैं।
दिलीप घोष का हमला—‘INDIA गठबंधन अब अस्तित्व में नहीं’
वहीं पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर उनकी एकजुटता का दावा भरोसेमंद नहीं लगता। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच चल रहे मतभेदों को हास्यास्पद स्थिति करार दिया। दूसरी ओर कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीकांत जेना ने बताया कि बैठक में देश की आर्थिक स्थिति, विदेश नीति, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियां और उनसे निपटने की रणनीति बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी स्पष्ट किया कि INDIA गठबंधन के सभी दल केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं जिन्हें वे लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के हितों के लिए नुकसानदायक मानते हैं। उन्होंने कहा कि विचारों की विविधता के बावजूद गठबंधन राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुट है और आगे भी मिलकर संघर्ष जारी रखेगा।
महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था पर बनेगी साझा रणनीति
बैठक में शिवसेना यूबीटी की ओर से भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन की प्रतिबद्ध सदस्य है और भविष्य में भी गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए काम करती रहेगी। संजय राउत ने कहा कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विपक्षी दलों को एकजुट रहना होगा। उनके अनुसार देश जिन गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनसे निपटने के लिए विपक्षी दलों का साथ आना जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि गठबंधन भविष्य में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा और देश में सार्थक राजनीतिक बदलाव लाने का प्रयास करेगा। जानकारी के मुताबिक बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना यूबीटी, एनसीपी शरद पवार गुट, सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, फॉरवर्ड ब्लॉक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, भाकपा माले, एमडीएमके, वीसीके, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, वीआईपी पार्टी, केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस मणि, बाप पार्टी और लोकदल सहित कुल 23 दलों के शामिल होने की संभावना है।
23 दल एक मंच पर, 2029 की रणनीति पर भी होगी चर्चा
ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक केवल विपक्षी दलों की नियमित बैठक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कवायद मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या INDIA गठबंधन अपने भीतर के मतभेदों को पीछे छोड़कर एक मजबूत और एकजुट विपक्ष का संदेश देने में सफल हो पाएगा या नहीं।
