आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 को लेकर जोधपुर में उद्योग संघों के साथ संवाद, शुल्क में 4 हजार रुपये कमी का प्रस्ताव
टीएफसी बोरानाडा में आयोजित संवादात्मक सत्र में निर्यातकों ने रखीं समस्याएं, मेले की अवधि पांच से चार दिन करने का सुझाव; स्टॉल आवंटन में पारदर्शिता पर जोर
जोधपुर : आगामी आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 के आयोजन को लेकर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स द्वारा जोधपुर के ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर, बोरानाडा में उद्योग संघों और प्रमुख हस्तशिल्प निर्यातकों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। बैठक में वैश्विक बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, निर्यातकों की चुनौतियों और आगामी मेले को अधिक प्रभावी एवं निर्यातक हितैषी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
वैश्विक व्यापार की चुनौतियों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत ईपीसीएच के उप निदेशक नवीन गौड़ के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना सहित परिषद के अन्य पदाधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों का स्वागत किया। ईपीसीएच चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने वर्तमान वैश्विक बाजार परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के बीच चल रहे युद्ध, शुल्क, व्यापारिक बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ा है। इसका प्रभाव भारतीय हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र पर भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच ईपीसीएच निर्यातकों को सहयोग एवं राहत देने के साथ ही आईएचजीएफ दिल्ली फेयर की व्यवस्थाओं को बेहतर और सुचारू बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
मेले की सहभागिता दर में 4 हजार रुपये कमी का प्रस्ताव
निर्यातकों को राहत देने के उद्देश्य से आईएचजीएफ दिल्ली फेयर की सहभागिता दर में 4 हजार रुपये की कमी करने का प्रस्ताव रखा गया है। डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि जोधपुर देश का दूसरा सबसे बड़ा हस्तशिल्प क्लस्टर है और यहां के निर्यातकों की राय इस पहल के लिए महत्वपूर्ण है। बैठक में मौजूद निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित शुल्क कमी का स्वागत करते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया।
मेले की अवधि पांच से चार दिन करने का सुझाव
संवाद के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को सामने रखा। जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने आईएचजीएफ दिल्ली फेयर की अवधि पांच दिन से घटाकर चार दिन करने का सुझाव दिया। इस सुझाव को बैठक में मौजूद अन्य निर्यातकों का भी समर्थन मिला। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि मेले की अवधि और व्यवस्थाओं को निर्यातकों एवं खरीदारों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
स्टॉल आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
ईपीसीएच चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने मेले में निविदा और स्टॉल आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया में निर्यातकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और स्टॉल आवंटन के दौरान होने वाली लॉटरी में निर्यातकों की मौजूदगी जैसे कदमों से प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकता है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने रखीं अपनी समस्याएं
संवाद के दौरान निर्मल भंडारी, नरेश बोथरा, हंसराज बाहेती और भरत दिनेश सहित अन्य उद्योग प्रतिनिधियों ने हस्तशिल्प निर्यात उद्योग के सामने आ रही चुनौतियों पर अपने विचार रखे।प्रतिनिधियों ने निर्यातकों के हित में ईपीसीएच की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और आगामी मेले को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए।
विदेशी खरीदारों को जोड़ने के लिए व्यापक प्रचार
कार्यक्रम के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में ईपीसीएच चेयरमैन ने वैश्विक व्यापार की मौजूदा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईएचजीएफ दिल्ली फेयर का विदेशों में व्यापक प्रचार किया जा रहा है। इसके लिए सामाजिक माध्यमों, भारतीय दूतावासों और अन्य अंतरराष्ट्रीय माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक विदेशी खरीदारों को मेले से जोड़ा जा सके।
मुक्त व्यापार समझौतों से नए बाजारों की उम्मीद
डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि भारत सरकार द्वारा किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों सहित विभिन्न नीतिगत प्रयास भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय हस्तशिल्प की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना और निर्यातकों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना ईपीसीएच की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
निर्यातक हितैषी मेले पर बनी सहमति
संवादात्मक सत्र के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों और ईपीसीएच के बीच खुले एवं सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई। शुल्क में कमी, मेले की अवधि, स्टॉल आवंटन में पारदर्शिता और विदेशी खरीदारों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। बैठक का उद्देश्य आगामी आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–ऑटम 2026 को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और निर्यातक हितैषी बनाना रहा।
