गाजीपुर : वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। नौसारे गांव के पास हुए इस दर्दनाक दुर्घटना में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 38 से अधिक श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद का दृश्य इतना भयावह था कि जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। घटनास्थल पर सड़क पर बिखरे जूते-चप्पल, बस का टूटा दरवाजा और चारों ओर फैले शीशे के टुकड़े इस हादसे की गंभीरता को बयां कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस तेज रफ्तार में थी और अचानक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत सक्रिय हो गई। राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। एंबुलेंस की मदद से घायलों को तुरंत नजदीकी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। वहां पहले से ही आपात स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम को अलर्ट कर दिया गया था। सुबह करीब 11 बजे जैसे ही हादसे की सूचना प्रशासन को मिली, वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर और अस्पताल पहुंच गए। एडीएम दिनेश कुमार, एएसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्र, सीएमओ डॉ. एस.के. पांडेय और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा तुरंत आपातकक्ष में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल था। जैसे ही एंबुलेंस पहुंच रही थीं, स्वास्थ्यकर्मी तुरंत घायलों को स्ट्रेचर पर उतारकर सीधे आपातकक्ष में ले जा रहे थे। डॉक्टरों की टीम बिना समय गंवाए उनका प्राथमिक उपचार कर रही थी। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही थी, जिन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती किया गया। घायलों की स्थिति का सही आकलन करने के लिए पोर्टेबल एक्स-रे मशीन की मदद ली जा रही थी। इससे डॉक्टरों को मौके पर ही चोटों की गंभीरता का पता चल रहा था और उसी आधार पर इलाज शुरू किया जा रहा था। प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को एक-एक करके अस्पताल के दूसरे तल पर स्थित आईसीयू और सर्जरी वार्ड में शिफ्ट किया गया।
प्रोफेसर स्वतंत्र सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार घायलों की निगरानी कर रही थी। डॉक्टरों का पूरा फोकस इस बात पर था कि किसी भी मरीज की हालत बिगड़ने न पाए और समय पर हर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जा सके। नर्सिंग स्टाफ भी पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा था।
इधर, हादसे की खबर मिलते ही घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में अपनों की तलाश में लोगों की भीड़ जुट गई। कई परिजन अपने प्रियजनों को देखकर भावुक हो गए, तो कुछ लोग अभी भी अपने रिश्तेदारों की जानकारी जुटाने में लगे हुए थे। राहत और बचाव कार्य में जुटे कई लोगों के कपड़ों पर खून के धब्बे साफ नजर आ रहे थे, जो इस हादसे की भयावहता को बयां कर रहे थे। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही किस तरह बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती है, यह घटना उसका ताजा उदाहरण है।
फिलहाल, सभी घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल भी बना दिया है।
