नई दिल्ली : दिल्ली सरकार ने राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राजधानी में कुल 16 किलोमीटर लंबे तीन नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिन पर 13 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। सरकार के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 12,014.91 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 2,940.46 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे दिल्ली के भविष्य में किया गया एक अहम निवेश बताया, जो आने वाले वर्षों में राजधानी की यातायात और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री के परिवहन से जुड़े ‘7-सी विजन’ को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस विजन का उद्देश्य साझा, सुलभ, सुविधाजनक, जाम-मुक्त, ऊर्जावान, स्वच्छ और अत्याधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नेट-जीरो उत्सर्जन और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य तभी हासिल किए जा सकते हैं, जब सार्वजनिक परिवहन को मजबूत और आकर्षक बनाया जाए। मेट्रो का यह विस्तार निजी वाहनों पर निर्भरता कम करेगा, जिससे ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण संभव हो सकेगा।
तीन नए कॉरिडोर, 13 स्टेशन
फेज-V (ए) के तहत स्वीकृत तीनों कॉरिडोर राजधानी के अलग-अलग हिस्सों को नई और बेहतर कनेक्टिविटी देंगे। कुल 13 मेट्रो स्टेशनों में से 10 स्टेशन अंडरग्राउंड और 3 स्टेशन एलिवेटेड होंगे। ये सभी कॉरिडोर मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से निर्बाध रूप से जुड़ेंगे, जिससे यात्रियों को इंटरचेंज की बेहतर सुविधा मिलेगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
पहला कॉरिडोर: आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ
फेज-V (ए) का सबसे महत्वपूर्ण और लंबा कॉरिडोर आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 9.913 किलोमीटर होगी और इस पर 9 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। यह लाइन सेंट्रल विस्टा क्षेत्र से होकर गुजरेगी और दिल्ली के प्रशासनिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक इलाकों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी। यह कॉरिडोर कर्तव्य भवनों, सरकारी दफ्तरों और प्रमुख राष्ट्रीय स्थलों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे प्रतिदिन लगभग 60 हजार सरकारी कर्मचारियों और करीब 2 लाख यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इस लाइन के जरिए आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, सीसीएस बिल्डिंग्स, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल, हाईकोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम और इंद्रप्रस्थ जैसे महत्वपूर्ण स्थान सीधे मेट्रो से जुड़ेंगे। इस कॉरिडोर पर कुल 9,570.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें से 2,337.24 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार वहन करेगी।
दूसरा कॉरिडोर: एयरोसिटी से आईजीडी टर्मिनल-1
फेज-V (ए) का दूसरा प्रमुख कॉरिडोर एयरोसिटी से इंदिरा गांधी घरेलू हवाई अड्डा टर्मिनल-1 तक प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर की लंबाई 2.26 किलोमीटर होगी और इस पर एक मेट्रो स्टेशन बनाया जाएगा। यह लाइन हवाई यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी और एयरपोर्ट तक मेट्रो की सीधी, तेज और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगी। इससे टैक्सी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और एयरपोर्ट क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव घटेगा। इस परियोजना की लागत 1,419.64 करोड़ रुपये होगी, जिसमें 351.86 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार देगी।
तीसरा कॉरिडोर: तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज
फेज-V (ए) का तीसरा कॉरिडोर तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 3.9 किलोमीटर होगी और इस पर 3 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। यह लाइन दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के इलाकों को बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और स्थानीय यात्रियों के लिए आवागमन को अधिक आसान और समयबद्ध बनाएगी। इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत 1,024.87 करोड़ रुपये है, जिसमें 251.36 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार वहन करेगी।
कुल मिलाकर, मेट्रो फेज-V (ए) का यह विस्तार दिल्ली को एक स्मार्ट, स्वच्छ और जाम-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न सिर्फ राजधानी की यातायात व्यवस्था को नया आयाम देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।
