लखनऊ : सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में “भारत में पशु नस्लों का विकास” कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान अमेठी, बरेली और मथुरा में पशुपालन अवसंरचना विकास निधि के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया। गंगा तटवर्ती 27 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, अब तक 10,000 से अधिक कुपोषित परिवारों को दुधारू गायें दी गईं। सीएम ने कहा कि “अन्नदाता किसानों की खुशहाली और समृद्धि के बिना भारत की कल्पना अधूरी है। कृषि और पशुपालन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और प्राकृतिक खेती का भविष्य गोवंश आधारित खेती में है।”
यूपी दुग्ध, अंडा और मत्स्य उत्पादन में अग्रणी

सीएम ने कहा “उत्तर प्रदेश आज दुग्ध, अंडा और मत्स्य उत्पादन में अग्रणी राज्य बन चुका है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इस कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के लिए चलाई जा रही तीन प्रमुख योजनाओं का भी उल्लेख किया। इसमें गो-आश्रय स्थल योजना 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश की सरकारी देखभाल। सहभागिता योजना पशुपालकों को 4 गोवंश और 1500 रूपये प्रति माह प्रति गोवंश की सहायता मिलेगी। इसके साथ ही कुपोषित परिवार योजन, दुधारू गाय प्रदान कर स्वावलंबी जीवन की ओर बढ़ावा आदि के बारे में बताया।
27 जिलों में विशेष अभियान
प्राकृतिक खेती के लिए गंगा तटवर्ती 27 जिलों और बुंदेलखंड के 7 जिलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों के दुष्परिणामों पर भी गंभीर चिंता जताई। पशुपालन पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन। राज्य व केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ उत्तर प्रदेश सरकार का एमओयू हस्ताक्षर हुआ।
