नई दिल्ली/लखनऊ : बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार, और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा SIR के जरिए संविधान के मूल्यों और आम जनता के वोट देने के अधिकार को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि “भाजपा S.I.R को लागू करके संविधान का ही विरोध कर रही है, जबकि हमारे द्वारा S.I.R का विरोध ‘संविधान’ को ही बचाने की कोशिश है। ये हारती हुई भाजपा की निशानी है। जनता भाजपा के ख़िलाफ़ वोट न डाल सके। इसीलिए वो जनता से वोट देने का अधिकार छीनना चाहती है।”
SIR लोकतंत्र के खिलाफ एक साजिश

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी वर्चस्ववादी और एकतंत्री सोच में लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की कोई जगह नहीं है। “वहाँ तो मनमर्ज़ी का मनोनयन चलता है। SIR लोकतंत्र के खिलाफ एक साजिश है। यह घोर निंदनीय है।”SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। जिसमें मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है। इसमें मृत, अपात्र या दोहराए गए नामों को हटाया जाता है। नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है, लेकिन बिहार में इसकी प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। यह पारदर्शी नहीं है। यह राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। इससे हज़ारों नाम वोटर लिस्ट से गायब हो सकते हैं
यह है विपक्ष की मांग
संसद में SIR पर खुली बहस, चुनाव आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग, वोटिंग अधिकारों की संविधानिक रक्षा आदि की मांग की है।
