नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट’ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और व्यावहारिक फैसला लिया है। संभावित ट्रैफिक जाम और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने अधिवक्ताओं को इस अवधि में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दे दी है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से किए गए अनुरोध पर लिया गया है। अदालत ने इस संबंध में एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 के बीच यदि किसी अधिवक्ता को अदालत परिसर में शारीरिक रूप से उपस्थित होने में कठिनाई होती है, तो वह वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकता है। सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक होगी। यानी जो अधिवक्ता चाहें, वे अदालत में व्यक्तिगत रूप से भी उपस्थित हो सकते हैं। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की सभी बेंच हाइब्रिड मोड में कार्य करेंगी, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।
दरअसल, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट के चलते राजधानी के कई इलाकों में भारी यातायात दबाव की आशंका है। भारत मंडपम सुप्रीम कोर्ट परिसर के अपेक्षाकृत नजदीक स्थित है, ऐसे में कार्यक्रम के दौरान कोर्ट के आसपास भी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। अदालत ने वर्चुअल पेशी को सुचारु बनाने के लिए यह भी कहा है कि संबंधित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड को पहले से साझा किए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी से बचा जा सके।
गौरतलब है कि भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहे इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इस समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर गहन मंथन होगा। हजारों की संख्या में विदेशी मेहमानों, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के आने से राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, समिट के दौरान दिल्ली में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा ट्रैफिक डायवर्जन, विशेष पास व्यवस्था और सुरक्षा जांच को भी सख्त किया जाएगा, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
