बरेली: बारादरी थाना क्षेत्र में साल 2018 में मजदूरी के पैसे को लेकर हुए विवाद में हुई हत्या के मामले में आखिरकार अदालत ने इंसाफ का फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) तबरेज अहमद की अदालत ने आरोपी रफीक अहमद जो कि रिटायर्ड फौजी है,उसको दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। पशुपति बिहार कॉलोनी निवासी शुजात हुसैन के बेटे शादाब ने रफीक अहमद के घर टाइल और पत्थर लगाने का काम किया था। कुल 14 हजार रुपये की मजदूरी तय हुई थी, लेकिन आरोपी ने सिर्फ 7,500 रुपये दिए और 6,500 रुपये रोक लिए थे।
गुस्से में आरोपी ने किया जानलेवा हमला
26 दिसंबर 2018 की शाम शादाब अपने भाई नूर मोहम्मद के साथ बकाया पैसे मांगने रफीक अहमद के पास गया था। इसी दौरान कहासुनी बढ़ गई और आरोपी ने गुस्से में आकर शादाब के सिर पर लाठी से वार कर दिया। इसके बाद उसने लाइसेंसी पिस्टल से नूर मोहम्मद को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
कोर्ट में चले मुकदमे में पेश हुए 12 गवाह
घटना के बाद पुलिस ने हत्या और जानलेवा हमले समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए।
अदालत का बड़ा फैसला, उम्रभर जेल में रहेगा आरोपी
इस मामले में एडीजे तबरेज अहमद की अदालत ने आरोपी रफीक अहमद को दोषी करार देते हुए हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जानलेवा हमले और गाली-गलौच के मामलों में भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है।
