तैयारियां अंतिम चरण में, दुनियाभर से उलेमा और जायरीन की आमद
बरेली : दरगाह आला हज़रत पर तीन दिवसीय उर्स-ए-रज़वी 18, 19 और 20 अगस्त को आयोजित होगा। दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ज़िला प्रशासन और दरगाह इंतज़ामिया व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं।
इस्लामिया मैदान में परचम कुशाई की रस्म
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18 अगस्त यानी सोमवार को कार्यक्रम का आगाज़ इस्लामिया मैदान में परचम कुशाई की रस्म से होगा। दोपहर 4 बजे हाजी अल्लाह बख्श के निवास से मुफ़्ती अहसन मियां की क़यादत में परचमी जुलूस रवाना होकर दरगाह पहुंचेगा। यह सलामी के बाद वापस आकर इस्लामिया मैदान में परचम कुशाई की जाएगी। इसके बाद महफ़िल -ए-मिलाद और रात 10:35 बजे हुज्जातुल इस्लाम के कुल शरीफ की रस्म होगी। रात में नातिया मुशायरा होगा जिसका तरही मिसरा है “पीते हैं तेरे दर का, खाते हैं तेरे दर का” और दूसरा मिसरा “हम तो खुद्दार हैं, खुद्दारी है शेवाह अपना”.
19 अगस्त को कुरानख्वानी से आगाज
उर्स के दूसरे दिन यानी 19 अगस्त (मंगलवार) को सुबह फ़ज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी से आगाज होगा। इसके बाद नामूसे-रिसालत, और आपसी सौहार्द कांफ्रेंस होगी। सुबह 9:58 बजे रेहाने मिल्लत और 10:30 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ होंगे। दिन में चादरपोशी और रात में दुनियाभर के उलेमा की तक़रीरें होंगी। रात 1:40 बजे मुफ़्ती-ए-आज़म-ए-हिन्द के कुल शरीफ होंगे।
कुल शरीफ के बाद उर्स का समापन
उर्स के तीसरे दिन यानी 20 अगस्त (बुधवार) की सुबह 8 बजे से नात-ओ-मनक़बत और तक़रीरों का सिलसिला शुरू होगा। यह दोपहर 2:38 बजे तक चलेगा। इसके बाद आला हज़रत के कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन होगा। दरगाह के नासिर कुरैशी ने बताया कि इस वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन की आमद की उम्मीद है। सुरक्षा, यातायात और ठहराव की विशेष व्यवस्था की गई है।
