बैग छीनने के चक्कर में छात्रा को धक्का देने वाला अपराधी भेजा जेल
बरेली : यूपी के बरेली की अपर जिला सत्र न्यायाधीश (एडीजे) अदालत (कोर्ट) ने सोमवार को एक सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। बैग छीनने के चक्कर में इंजीनियर युवती को ट्रेन से धक्का देने वाले आरोपी को उम्र कैद की सजा और 2,00,000 का जुर्माना लगाया है। यह मामला करीब 10 साल पुराना है। एडीजे तबरेज अहमद ने 13 गवाह को सुना, इसके बाद आरोपी राहुल गिहार निवासी कंचनपुर, पीपलसाना थाना भोजीपुरा, बरेली को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई। आरोपी को आजीवन कारावास और दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया है।
जानें क्या है पूरा मामला ?
जागृति शर्मा, जो बरेली शहर की निवासी और इंजीनियर हैं, 19 अगस्त 2016 को उत्तराखंड के किच्छा जाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) की इज्जतनगर स्टेशन से लखनऊ वाया बरेली,लालकुआं – काठगोदाम जाने वाली लखनऊ काठगोदाम एक्सप्रेस में सवार हुई थीं। ट्रेन के भोजीपुरा स्टेशन से चलने के दौरान आरोपी ने इंजीनियर युवती के हाथ से बैग छीनने के चक्कर में धक्का दे दिया।
30 घंटे बाद आया था होश
आरोपी ने हाथ से बैग छीनने के चक्कर में इंजीनियर युवती को धक्का दे दिया। जिससे वह ट्रेन से गिर गई। आरोपी बैग छीनकर फरार हो गया।राहगीरों की सूचना पर इंजीनियर युवती को गंभीर हालत में नैनीताल रोड स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां 30 घंटे तक होश नहीं आया।
पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज
पीड़िता के पिता सुमन प्रकाश ने बहेड़ी कोतवाली में 20 अगस्त, 2016 को मुकदमा दर्ज करने को तहरीर दी थी। पुलिस ने धारा 394, 307 और 411 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की। एसओ बहेड़ी रोहन लाल ने जांच पड़ताल की। इसके साथ ही यह मुकदमा राजकीय रेल पुलिस के बरेली सिटी स्टेशन स्थित थाने को ट्रांसफर किया गया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। उसके पास से लूट का बैग, और अवैध तमंचा, और कारतूस बरामद हुए थे। आरोपी को पुलिस ने जेल भेजा था।
13 गवाह हुए पेश
इस मामले में अदालत में 13 गवाह पेश किए गए। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वरी गंगवार ने साक्ष्य पेश किए। इसके साथ ही आरोपी की तरफ से अधिवक्ता अनूप सिंह ने बचाव में पक्ष रखा। 10 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया। इसमें धारा 394 में उम्र कैद और 1,00,000 जुर्माना, जबकि धारा 307 में 10 साल की सजा और 1,00,000 जुर्माना सुनाया गया। जुर्माना न अदा करने पर 6 माह अतिरिक्त सजा का आदेश दिया गया।
परिजनों ने बताया न्याय की जीत
पीड़िता की तरफ से अधिवक्ता राजेश्वरी गंगवार और आरोपी की तरफ से अनूप सिंह ने केस की पैरवी की। पीड़ित परिवार ने अदालत में न्याय की जीत की बताई। पीड़िता को राहत मिली। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वरी गंगवार ने कहा इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि महिलाओं पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। अदालत ने कठोर सजा देकर अपराधियों को संदेश दिया है कि कानून की नजर से कोई भी बच नहीं सकता। यह फैसला उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती हैं।
