हजारों अकीदतमंदों की शिरकत, उलेमा-ए-किराम के बयान और खास दुआओं से सजी रूहानी महफिल
बरेली : शहर की मशहूर दरगाह खानकाहे आलिया मोहम्मदिया क़दीरिया रफ़ीक़िया स्थित मस्जिद रफीकुल औलिया में शाहजी रफीकुल औलिया का उर्स का 16वां सालाना उर्स कुल शरीफ के साथ अकीदत और एहतराम के माहौल में मुकम्मल हो गया। उर्स के मौके पर दूर-दराज से आए अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत की और दरगाह पर हाजिरी देकर दुआएं मांगीं। कुल शरीफ की महफिल में हजरत मुन्ने मियां साहब (साहिबे सज्जादा, पीलीभीत शरीफ) की खास मौजूदगी रही, जिससे महफिल की रौनक और बढ़ गई।
उलमा ने सुनाया बुजुर्गों का पैगाम

महफिल के दौरान हजरत असलम मियां ने खुसूसी खिताब फरमाया, जबकि साहिबे सज्जादा हजरत मोहिब मियां ने शाहजी रफीकुल औलिया के पैगामात को आम करते हुए उनकी जिंदगी को मुहब्बत, खिदमत और सूफी परंपरा की मिसाल बताया। नमाज-ए-जुहर के बाद कुल शरीफ की महफिल सजाई गई, जिसमें हाफिज सलीम, सैय्यद मुहम्मद वसी, मौलाना समी अख्तर रामपुरी, कारी गुलाम यासीन, नौशाद सीतापुरी और कैफ रफीक समेत कई शायरों और उलेमा ने अपने -अपने अंदाज में कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया।
जिंदगी पीर की मुहब्बत में की वक्फ
पीलीभीत से आए मौलाना अतीक ने अपने बयान में कहा कि शाहजी रफीकुल औलिया ने अपनी पूरी जिंदगी अपने पीर की मुहब्बत में वक्फ कर दी। उन्होंने शेर पढ़ते हुए अकीदतमंदों को भावुक कर दिया—“तेरे कदमों में मुकद्दर से जगह पाई है,
तेरी निस्बत मुझे दरबार में ले आई है…”
महफिल के आखिर में सज्जादा नशीन हजरत मोहिब मियां ने फातिहा पढ़कर मुल्क और उम्मत की सलामती के लिए खास दुआएं कीं। इस दौरान नायब सज्जादा फय्यूख अहमद, हसीन अहमद सहित कई उलेमा, हाफिज और अकीदतमंद मौजूद रहे। कुल शरीफ की इस रूहानी महफिल में फैजी मुमताज, जुनैद रफीकी, फैजान रफीकी, नन्ने भाई, नबी हसन, इरशाद रफीकी और हजारों की तादाद में आए चाहने वालों ने शिरकत कर दुआएं मांगीं और अपनी मुरादें हासिल कीं। उर्स के समापन के साथ पूरे इलाके में रूहानी सुकून और भाईचारे का माहौल देखने को मिला।
