जिला जज की अदालत का अहम फैसला जुर्माने की राशि से दोनों बच्चों को 25-25 हजार रुपये देने के आदेश
बरेली : दहेज हत्या के एक चर्चित मामले में बरेली की जिला सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति, सास, ससुर और देवर को दोषी करार दिया है। अदालत ने चारों आरोपियों को दहेज मृत्यु के मामले में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी कारावास और अर्थदंड लगाया गया है। अदालत के आदेश के बाद सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। इस मामले की प्रभावी पैरवी में डीजीसी रीतराम राजपूत की अहम भूमिका रही।
7 साल पहले हुई थी शादी
यह मामला इज्जतनगर थाना क्षेत्र के फरीदापुर चौधरी गांव का है।अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार शाजिया का विवाह 22 अप्रैल, 2019 को मुस्लिम रीति -रिवाज के साथ युसुफ खां के साथ हुआ था। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद दहेज को लेकर विवाद शुरू हो गया। मृतका के परिजनों का आरोप था कि विवाह के बाद से ही शाजिया को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा। परिजनों के अनुसार शाजिया ने कई बार अपने मायके वालों को उत्पीड़न की जानकारी दी थी। दोनों परिवारों के बीच कई बार समझौते के प्रयास भी किए गए, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।
दो साल पहले दहेज ने ले ली जान
इसी बीच 28 नवंबर,2024 को शाजिया की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलने पर मायके पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। मृतका के भाई अकबर खान की तहरीर पर इज्जतनगर थाने में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को संकलित किया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने पति युसुफ खां, सास मुमताज बानो, ससुर शमशाद खां और देवर शराफत अली के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायालय में चली, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपियों को राहत देने की मांग की। सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद जिला सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह-द्वितीय ने चारों आरोपियों को दहेज मृत्यु और दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। अदालत ने दहेज मृत्यु के मामले में चारों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अन्य धाराओं में भी दंडित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
बच्चों को 25-25 हजार की आर्थिक मदद
फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि न्यायालय ने मृतका के दोनों बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपियों से वसूले जाने वाले जुर्माने में से 25-25 हजार रुपये दोनों बच्चों को दिए जाएं। वर्तमान में दोनों बच्चे अपनी ननिहाल में रह रहे हैं। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया। वहीं क्षेत्र में भी इस निर्णय की चर्चा है। लोगों का मानना है कि दहेज हत्या और महिला उत्पीड़न जैसे मामलों में अदालत के ऐसे फैसले समाज में कड़ा संदेश देने का काम करते हैं। उल्लेखनीय है कि डीजीसी रीतराम राजपूत इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में दोषियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद चारों दोषियों को जेल भेज दिया गया है और मामला न्यायिक प्रक्रिया के इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंच चुका है।
