प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें, सोशल मीडिया पर वीडियो-फोटो साझा न करने की सलाह, दरगाह आला हज़रत से भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने पर जोर
बरेली : जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मियां) ने ईद -उल-अज़हा को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी करते हुए लोगों से खुले या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष देशभर में ईद-उल-अज़हा 28 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी और त्योहार को शांति, स्वच्छता और आपसी भाईचारे के साथ मनाया जाए।
सुबह 6 बजे से 10.30 बजे तक नमाज
उन्होंने बताया कि ईद की नमाज़ सुबह 6 बजे से 10:30 बजे तक अदा की जाएगी। इसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होगा।कुर्बानी का अमल 28 मई को सुबह फर्ज नमाज (सूर्योदय) से शुरू होकर 30 मई मगरिब की नमाज (सूर्यास्त) तक जारी रहेगा। इस दौरान इस्लामी माह ज़िलहिज्जा की 10, 11 और 12 तारीखों में कुर्बानी की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अज़हा हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की याद में मनाया जाने वाला बड़ा त्योहार है और हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान पर कुर्बानी वाजिब होती है।
बंद स्थानों पर करें कुर्बानी
फरमान मियां ने लोगों को खास हिदायत देते हुए कहा कि कुर्बानी केवल बंद और निर्धारित स्थानों पर ही की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी किसी भी हाल में न की जाए और कानून व प्रशासनिक निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छता पर जोर देते हुए कहा कि जानवरों के अपशिष्ट पदार्थों को गड्ढा खोदकर जमीन में दफन किया जाए और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि खून नालियों या सड़कों पर न बहे, ताकि किसी को असुविधा न हो और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे।
सोशल मीडिया पर न डालें फोटो
सोशल मीडिया को लेकर भी फरमान मियां ने लोगों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि जानवरों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने से बचें और अपने हमवतन भाइयों की भावनाओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि त्योहार के मौके पर आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि छोटे जानवर जैसे भेड़, बकरा और दुम्बा एक व्यक्ति की ओर से कुर्बान किए जाते हैं, जबकि बड़े जानवरों में अधिकतम सात लोग हिस्सेदारी कर सकते हैं।
