बरेली : कोर्ट ने तीन अलग-अलग गंभीर मामलों,नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म, प्रेम संबंध में युवक की हत्या और खेत के विवाद में मारपीट में अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा और जुर्माना लगाया है। तीनों ही मामलों में कोर्ट ने साफ कर दिया कि गंभीर अपराधों में सख्ती बरती जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
छात्रा से दुष्कर्म, 20 साल की सजा और जुर्माना
साल 2017 के मामले में आरोपी फईम खान को कोर्ट ने दोषी मानते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। अदालत ने उसे धारा 363 में 6 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना दिया है, जुर्माना न देने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। इसके अलावा अन्य संबंधित धारा में 7 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है, जुर्माना न देने पर 3 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। वहीं पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को 20 साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है, जुर्माना न देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
प्रेम संबंध में हत्या, दो आरोपियों को उम्रकैद
दूसरे मामले में मंजू और उसके बेटे अर्जुन को युवक की हत्या का दोषी पाया गया। कोर्ट ने दोनों को धारा 302/34 के तहत उम्रकैद की सजा और 5-5 हजार रुपये जुर्माना दिया है। जुर्माना न देने पर 15-15 दिन की अतिरिक्त सजा होगी। इसके साथ ही धारा 201 के तहत सबूत मिटाने के आरोप में दोनों को 5-5 साल की सजा और 2-2 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है, जिसे न देने पर 7-7 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
खेत विवाद में हमला,दोनों आरोपियों को सजा
तीसरे मामले में खेत की सिंचाई को लेकर हुए विवाद में आरोपियों ने मारपीट और घर में घुसकर हमला किया। इस मामले में कोर्ट ने धर्मवीर और रामवीर को दोषी मानते हुए धारा 308 में 5-5 साल की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना दिया है, जुर्माना न देने पर 6-6 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। धारा 452 में 3-3 साल की सजा और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है, जुर्माना न देने पर 3-3 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। धारा 504 में 1-1 साल की सजा और 2-2 हजार रुपये जुर्माना दिया गया है, जिसे न देने पर 2-2 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। वहीं धारा 323 में 6-6 महीने की सजा और 500-500 रुपये जुर्माना लगाया गया है, जुर्माना न देने पर 1-1 महीने की अतिरिक्त सजा होगी।
कोर्ट का सख्त संदेश
इन तीनों मामलों में अदालत ने साफ संदेश दिया है कि कानून के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में राहत नहीं मिलेगी। गवाहों और सबूतों के आधार पर सख्त फैसले सुनाए गए हैं, जिससे आम लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूत होता है।
