बरेली : यूपी के बरेली से बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है। यहां आंवला क्षेत्र के मझगवां ब्लॉक अंतर्गत अनिरुद्धपुर ग्राम पंचायत की वृहद गोशाला में भूख से पांच गोवंशों की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।।डीएम अविनाश सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि गोवंश संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गोशाला में अव्यवस्थाओं ने ली गोवंशों की जान
जानकारी के मुताबिक अनिरुद्धपुर स्थित गोशाला में लंबे समय से पशुओं को पर्याप्त भूसा, हरा चारा और चोकर नहीं मिल रहा था। इसी लापरवाही के चलते पांच गोवंशों की भूख से मौत हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
वायरल वीडियो के बाद खुली लापरवाही की परतें
गोशाला में पशुओं की दुर्दशा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, लेकिन आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इस पर संज्ञान नहीं लिया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय ने पशुपालन विभाग के निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया है कि यदि वायरल वीडियो पर समय से कार्रवाई होती, तो गोवंशों की मौत रोकी जा सकती थी।
प्रशासन का कड़ा एक्शन
प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर ग्राम विकास अधिकारी (पंचायत सचिव) शिप्रा सिंह को निलंबित कर दिया है। ग्राम प्रधान रचना देवी, उनके पति दिनेश कुमार और केयरटेकरों के खिलाफ अलीगंज थाने में FIR पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है। सीडीओ की संस्तुति पर डीएम ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय के स्थानांतरण और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के निलंबन के लिए पशुपालन विभाग के निदेशक को पत्र भेजा है।
नोडल अधिकारी भी कार्रवाई की जद में
बताया जा रहा है कि गोशाला के नोडल अधिकारी, मंडी परिषद के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विश्वेंद्र कुमार भी अब कार्रवाई की जद में आ गए हैं। जिला प्रशासन दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के आरोपों के तहत इनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
सीडीओ का सख्त संदेश
मुख्य विकास अधिकारी देवयानी ने स्पष्ट किया है कि “अब यदि किसी भी गोशाला में पशुओं के भूख से मरने या चारा न मिलने की शिकायत सामने आती है, तो सीधे नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उसी अनुरूप कार्रवाई होगी।”उन्होंने बताया कि डीएम द्वारा पत्राचार के बावजूद अभी तक सीवीओ का स्थानांतरण और पशु चिकित्सा अधिकारी का निलंबन नहीं हुआ है, लेकिन पशुपालन निदेशालय से संपर्क कर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
डीएम की सख्त चेतावनी
डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि “गोशाला की देखरेख में जिस तरह की उदासीनता सामने आई है, वह बेहद गंभीर है। समाज और जान कल्याण से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।”डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि गोशालाओं की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे भी कठोर कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
