बरेली : यूपी के बरेली देहात के नवाबगंज में धरना स्थल से पंडाल हटाए जाने के बाद सियासी माहौल अचानक गरमा गया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार गुरुवार सुबह एसडीएम आवास के सामने धरने पर बैठ गए। दरी बिछाकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन जल्द ही बड़े राजनीतिक जमावड़े में बदल गया।सूचना मिलते ही सपा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौके पर पहुंची, और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हालात को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हालांकि, प्रशासन के समझाने के बाद मामला शांत हो सका।
रात की कार्रवाई बनी विवाद की जड़
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री ने 15 मार्च को एसडीएम उदित पवार को ज्ञापन देकर क्षेत्र की 15 मांगों के निस्तारण की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी न होने पर 2 अप्रैल को धरना दिया जाएगा। धरना स्थल तय समय पर सरदार वल्लभभाई पटेल चौक, नवाबगंज में शुरू हुआ। मगर, प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद भी समर्थकों ने पंडाल लगाया। देर रात पुलिस ने पहुंचकर पंडाल हटवा दिया। यही कार्रवाई पूरे विवाद की वजह बन गई।
SDM आवास बना धरना स्थल
प्रशासन की कार्रवाई से नाराज़ पूर्व मंत्री गुरुवार सुबह सीधे एसडीएम आवास पहुंच गए, और वहीं धरने पर बैठ गए। इस अचानक कदम से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में सपा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी थी। इस दौरान सपाइयों ने पुलिस -प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर डटे रहे।
अधिकारियों के समझाने के बाद स्थिति काबू में
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और सीओ मौके पर पहुंचे और पूर्व मंत्री से वार्ता कर धरना समाप्त कराने की कोशिश की। फिलहाल स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। प्रशासन का पक्ष है कि।कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अनुमति नहीं दी गई। मगर,बिना अनुमति पंडाल लगाने पर कार्रवाई आवश्यक थी। हालांकि,सपाइयों का आरोप है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर
विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है।
