फ़ज्र के वक़्त हुआ इंतिक़ाल, ककराला (बदायूँ) में नमाज़ -ए-जनाज़ा के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक, देशभर से उमड़े हज़ारों मुरीदीन, उलमा और अकीदतमंद
बरेली : शहर की मशहूर ख़ानक़ाह-ए-आलिया सक़लैनिया शराफ़तिया में शनिवार सुबह उस समय ग़म की लहर दौड़ गई, जब पीर-ओ-मुर्शिद हज़रत क़िब्ला शाह मोहम्मद सक़लैन मियाँ हुज़ूर अलैहिर्रहमा की ज़ौजा-ए-मोहतरमा तथा पीर-ओ-मुर्शिद हज़रत शाह मुहम्मद हाजी मियाँ हुज़ूर की वालिदा माजिदा का फ़ज्र के वक़्त रज़ा-ए-इलाही से विसाल (इंतिक़ाल) हो गया। इस दुखद समाचार के फैलते ही बरेली समेत विभिन्न राज्यों और जनपदों से बड़ी संख्या में मुरीदीन, मुहिब्बीन और अकीदतमंद ख़ानक़ाह शरीफ़ पहुँचने लगे।मरहूमा का जनाज़ा मुबारक पहले ख़ानक़ाह शरीफ़ में रखा गया, जहाँ लोगों ने नम आँखों से आख़िरी दीदार कर उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। इसके बाद जनाज़ा उनके आबाई वतन कस्बा ककराला, ज़िला बदायूँ ले जाया गया। ककराला स्थित दरगाह हज़रत शाह शुजाअत अली मियाँ रहमतुल्लाह अलैह के अहाते में नमाज़ -ए-जनाज़ा अदा की गई। नमाज़-ए-जनाज़ा की इमामत उनके साहिबज़ादे एवं सज्जादानशीन पीर-ओ-मुर्शिद हज़रत शाह मोहम्मद ग़ाज़ी मियाँ हुज़ूर ने फ़रमाई।
नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद सुपुर्द-ए-खाक
उन्हें अश्कबार आँखों के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।तदफ़ीन के मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए हज़ारों मुरीदीन, मुहिब्बीन, अकीदतमंद, मुफ़्तियाने किराम, उलमाए किराम और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने शिरकत की सभी ने मरहूमा के लिए मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दराजात और सब्र-ए-जमील की दुआएँ कीं। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल रहा और फ़ातिहाख़्वानी का सिलसिला जारी रहा। ख़ानक़ाह से जुड़े लोगों ने कहा कि मरहूमा का इंतिक़ाल ख़ानदान, सिलसिला-ए-सकलैनिया और तमाम अकीदतमंदों के लिए अपूरणीय क्षति है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अल्लाह तआला से मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाने की दुआ की।
