बरेली : शहर के सीबीगंज थाना क्षेत्र स्थित नदौसी कान्हा उपवन गोशाला में तीन दिनों के भीतर 15 गोवंशों की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। मृत गोवंशों को नगर निगम की ट्रैक्टर-ट्रॉली से निस्तारण के लिए ले जाते समय गोरक्षकों और हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया। इसके बाद देर रात तक हंगामा और विरोध-प्रदर्शन चला। इस मामले में पशुओं की देखरेख में लापरवाही और कथित क्रूरता के आरोप लगाते हुए गोशाला के सुपरवाइजर समेत चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम कराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इस मामले में सीबीगंज थाना पुलिस से जानकारी की कोशिश की गई। मगर, पुलिस न उठने से संर्पक नहीं हो सका।
मृत गोवंशों को ले जाते समय खुला मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अगस्त को गोशाला से सात मृत गोवंशों को बाहर ले जाया जा रहा था।मृत पशुओं की हालत देखकर इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई। इसके बाद गोसेवकों और कार्यकर्ताओं ने गोशाला पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बताया गया कि गोशाला परिसर में कीचड़, गंदगी और कमजोर गोवंश मिले। आरोप है कि पशुओं के लिए पर्याप्त साफ चारा और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं थी। गोसेवकों ने गोशाला की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों के सामने सवाल उठाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
31 अगस्त की रात फिर सामने आईं कई मौतें
यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि 31 अगस्त की रात करीब आठ बजे नगर निगम की ट्रैक्टर -ट्रॉली में करीब आठ मृत गोवंशों को निस्तारण के लिए ले जाया जा रहा था। नदौसी के पास गोसेवकों ने ट्रॉली को रोक लिया। इसके बाद मृत गोवंशों की स्थिति को लेकर विरोध शुरू हो गया।इस तरह उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 29 अगस्त के सात और 31 अगस्त के करीब आठ मृत गोवंशों को मिलाकर कुल 15 मौतें सामने आई हैं। यही संख्या उपलब्ध प्रेस रिपोर्ट में दर्ज है।
गोशाला की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
गोसेवकों की ओर से आरोप लगाया गया कि गोशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, साफ पानी और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध नहीं था। परिसर में गंदगी और कीचड़ होने तथा कमजोर और बीमार गोवंशों की उचित देखरेख नहीं किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, गोवंशों की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल लापरवाही और पशु क्रूरता के आरोपों की जांच की जा रही है।
सुपरवाइजर समेत चार लोगों पर रिपोर्ट
इस मामले में सुपरवाइजर विजय उर्फ बनवारी, भूसा सप्लायर रचित अग्रवाल (आरके इंटरप्राइजेज) और विशाल मल्होत्रा समेत चार लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में गोशाला के संचालन, देखरेख और पशुओं को चारा उपलब्ध कराने से जुड़े लोगों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम समेत संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम
इस मामले में मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। गोसेवकों की ओर से मांग की गई है कि पोस्टमार्टम पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में कराया जाए, ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हंगामे के बाद पुलिस-प्रशासन ने संभाली स्थिति
मामले को लेकर देर रात तक गोसेवकों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति संभाली और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने गोशाला की व्यवस्थाओं और गोवंशों की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच कराने की बात कही। फिलहाल, पुलिस का फोकस मौतों की वास्तविक वजह पता लगाने, गोशाला की व्यवस्थाओं की जांच करने और नामजद आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने पर है। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोवंशों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
