सरकारी नौकरी और लोन दिलाने का लालच देकर युवाओं के दस्तावेज लेते थे आरोपी, फर्जी वेतन पर्ची और Form-16 बनाकर बैंक से लाखों का लोन कराने का आरोप
बरेली : यूपी के बरेली देहात की भोजीपुरा थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों के नाम पर लाखों रुपये का लोन कराकर रकम हड़पने वाले कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस, SOG और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।पुलिस के मुताबिक, गिरोह जरूरतमंद और बेरोजगार लोगों को सरकारी योजना के तहत लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था और फिर उन्हीं दस्तावेजों में हेरफेर कर बैंक से बड़ा लोन स्वीकृत कराता था।
फर्जी दस्तावेजों से तैयार करते थे सरकारी कर्मचारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों के आधार कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नए सिम और बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों में कुछ समय तक वेतन के नाम पर रकम ट्रांसफर की जाती थी, ताकि बैंक रिकॉर्ड में नियमित आय दिखाई दे। आरोपियों पर फर्जी पहचान पत्र, वेतन पर्ची और Form-16 तैयार कर लोगों को कागजों में सरकारी कर्मचारी या वेतनभोगी दिखाने का आरोप है। इसके बाद उनकी कथित आय और दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन कराया जाता था।
15 से 20 लाख रुपये तक लोन कराने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, गिरोह बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक समेत अन्य बैंकों से करीब 15 से 20 लाख रुपये तक का लोन स्वीकृत कराने का खेल करता था। लोन की रकम खातों में पहुंचने के बाद आरोपी चेक और ATM/डेबिट कार्ड के माध्यम से रकम निकाल लेते थे। एक मामले में पुलिस ने बताया कि लखीमपुर खीरी के एक व्यक्ति के नाम पर 20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया, जबकि उसे कथित तौर पर सिर्फ 71 हजार रुपये दिए गए। बाकी रकम गिरोह के सदस्यों द्वारा हड़पने का आरोप है।
75 ATM कार्ड और 28 चेकबुक बरामद
पुलिस कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से 3.50 लाख रुपये नकद, 75 डेबिट/ATM कार्ड, 28 चेकबुक, सात बैंक पासबुक और 12 मोबाइल फोन समेत बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक फर्जी पहचान पत्र, आधार-पैन कार्ड और बैंकिंग से जुड़े अन्य सामान भी बरामद हुए हैं।
मॉडर्न विलेज से चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर भोजीपुरा क्षेत्र के मॉडर्न विलेज स्थित एक मकान में दबिश दी गई। यहां से राम नयन गुप्ता उर्फ कृष्णा गुप्ता, राकेश गुप्ता, अनिल गुप्ता और ऋषभ कुमार सक्सेना को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
एक आरोपी की तलाश, बैंक नेटवर्क की भी जांच
पूछताछ में एक अन्य आरोपी आमिर खां उर्फ यामिर खां का नाम सामने आने की जानकारी पुलिस रिपोर्ट में दी गई है। उसकी तलाश की जा रही है। साथ ही पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क, बैंक खातों में हुए लेनदेन और कथित तौर पर इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार बैंक एजेंटों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
बेरोजगार युवाओं को बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार, गिरोह जरूरतमंद लोगों को सरकारी नौकरी या सरकारी योजना के तहत आसान लोन मिलने का भरोसा दिलाता था। इसके बाद उनसे पहचान और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज लिए जाते थे। कागजों में फर्जी नौकरी और आय दिखाकर लोन की पात्रता तैयार की जाती और रकम मिलने के बाद उसका बड़ा हिस्सा आरोपी निकाल लेते थे। इस मामले ने एक बार फिर फर्जी दस्तावेजों और आसान लोन के नाम पर होने वाली साइबर/वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत सामने रखी है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और बैंक लेनदेन की जांच में जुटी है।
