चुनाव आयोग का नया नियम असंवैधानिक, सपा का विरोध प्रदर्शन तेज़, बुर्केवाली मतदाताओं की पहचान जांच को बताया गलत
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में हर वर्ग दलित, महिला, गरीब, किसान, पीड़ित और प्रताड़ित है। सरकार के आंकड़े फर्जी हैं और सत्ता झूठे आंकड़ों से जनता को गुमराह कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि “भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। दलितों और महिलाओं के साथ उत्पीड़न बढ़ गया है, और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा।”उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रायबरेली में वाल्मीकि समाज के युवक की हत्या जैसी घटनाओं में भी न्याय की उम्मीद धूमिल पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार सामंती मानसिकता से काम कर रही है।
संविधान की अनदेखी का आरोप
सपा प्रमुख बोले – भाजपा संविधान और कानून की अनदेखी कर रही है। सत्ता के संरक्षण में दबंग गरीबों की जमीनें कब्जा रहे हैं और भूमाफिया खुलेआम बजट लूट रहे हैं। “भाजपा सरकार में अराजकता की पराकाष्ठा है। पीड़ितों पर दबाव बनाकर समझौते कराए जाते हैं और अपराधियों को संरक्षण दिया जाता है।”अखिलेश ने कहा कि भाजपा अब पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग की एकजुटता से घबराई हुई है। वह इन वर्गों के आरक्षण और नौकरियां छीनकर उन्हें कमजोर करने की साजिश रच रही है।
भाजपा के झूठे वायदों को जनता जान गई
उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा के झूठे वादों को पहचान चुकी है और 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। “सपा की सरकार बनने पर नौजवानों को नौकरी, गरीबों को न्याय और किसानों को खाद-बीज की सुविधा मिलेगी।
सपा ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल, “बुर्केवाली महिलाओं की पहचान जांच अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक”
समाजवादी पार्टी ने सोमवार को चुनाव आयोग के नए निर्देश पर कड़ा विरोध जताया है। निर्देश में कहा गया है कि बुर्केवाली महिला मतदाताओं की पहचान आंगनवाड़ी सेविकाओं से कराई जाए और जांच के बाद ही उन्हें मतदान की अनुमति दी जाए। सपा ने इस निर्देश को “अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण” बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित ज्ञापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को सौंपते हुए कहा कि यह आदेश भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के विपरीत है। ज्ञापन में कहा गया है कि आयोग की Hand Book for Returning Officer (पृष्ठ 143, पैरा 13.6.9) के अनुसार मतदाता की पहचान करने का अधिकार मतदान अधिकारी को है, न कि किसी बाहरी व्यक्ति को। “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यह नया निर्देश आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। इससे देश में एक विशेष सम्प्रदाय को निशाना बनाया जा रहा है।”
निष्पक्ष रूप से होने चाहिए चुनाव
सपा नेताओं के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र सिंह और राधेश्याम ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि निर्देश तुरंत वापस लिया जाए, ताकि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव भयमुक्त और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सकें। सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के ये दोनों बयान ट्रेंड कर रहे हैं।
यूज़र्स भाजपा सरकार पर तीखे सवाल उठा रहे हैं तो कई लोग सपा के पीडीए मॉडल की चर्चा कर रहे हैं।
