रामपुर: जिला की सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान से उनके आवास पर मुलाकात की। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक ने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। अखिलेश यादव दोपहर करीब 12:45 बजे बरेली से हेलीकॉप्टर के जरिए रामपुर पहुंचे। जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने हेलीपैड पर आजम खान ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता सीधे आजम खान के घर पहुंचे, जहां लंबे समय तक बंद कमरे में बातचीत होती रही।
करीब 2 घंटे 25 मिनट बाद अखिलेश यादव बाहर निकले और मीडिया से बात की। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि योगी सरकार एक राजनीतिक परिवार पर झूठे केसों का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने में लगी है। अखिलेश यादव ने आजम खान को समाजवादी पार्टी का मजबूत “दरख्त” बताया और कहा कि उनकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी सत्ता उन्हें हिला नहीं सकती। उनके इस बयान से यह संदेश साफ झलकता है कि समाजवादी पार्टी में आजम खान की भूमिका और सम्मान बरकरार है।
मुलाकात के दौरान की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसने चर्चा को और बढ़ा दिया है। तस्वीर में अखिलेश यादव और आजम खान एक सोफे पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि उनके सामने अब्दुल्ला आजम झुककर गंभीरता से बात करते दिख रहे हैं। यह तस्वीर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा करती दिखी। अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब्दुल्ला आजम एक बार फिर रामपुर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में आजम खान और उनके परिवार को कई कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। फर्जी जन्म प्रमाणपत्र केस में आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम को सात साल की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के कारण तीनों अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। बावजूद इसके, अखिलेश यादव की यह मुलाकात दर्शाती है कि समाजवादी पार्टी अब भी आजम परिवार को अपने राजनीतिक ढांचे का अहम हिस्सा मानती है।
अखिलेश यादव ने इस दौरान कहा कि वह जेल में आजम खान से मुलाकात नहीं कर पाए थे, इसलिए आज घर आए हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले रामपुर में समाजवादी पार्टी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी के भीतर आजम खान के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता, और अखिलेश यादव ने इस दौरे से स्पष्ट संदेश दिया है कि सपा में न तो दूरी है और न ही मतभेद।
यह मुलाकात सपा के लिए न सिर्फ एक प्रतीकात्मक एकजुटता का संकेत है, बल्कि आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरणों की नींव भी साबित हो सकती है। अखिलेश यादव और आजम खान की यह तस्वीर समाजवादी परिवार की एकता और भरोसे की कहानी बयां करती है — एक ऐसा भरोसा, जो शायद आने वाले चुनावी मौसम में सपा की सियासत को नई दिशा दे सकता है।
