जंग-ए-आजादी में केरल का सिपाही, जिसने अंग्रेज़ों को ललकारा
भारत की आज़ादी की जंग में बहुत से नाम किताबों में दर्ज हुए। मगर, कुछ ऐसे भी नाम हैं, जिनका ज़िक्र कम हुआ, जबकि उनका योगदान बेहिसाब था। मौलाना मुहम्मद अब्दुर रहमान उन्हीं भूले-बिसरे सिपाहियों में से एक हैं। मौलाना अब्दुर रहमान, केरल के एक मशहूर राष्ट्रवादी और समाज सुधारक थे। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ मिलकर ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की। उनके आंदोलनों का असर सिर्फ़ केरल तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दक्षिण भारत में आज़ादी की लहर पैदा हुई।
मौलाना का अंग्रेजों के खिलाफ जन जागरूकता अभियान
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https://youtu.be/NkJ5y4QwCrI?si=62QrRYz7DYRKFNFW
उन्होंने मालाबार, और केरल के अन्य इलाक़ों में जन जागरूकता अभियान चलाया। शिक्षा के फ़ैलाव, सामाजिक सुधार और साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देना उनका मिशन था। उनके भाषणों और आंदोलनों ने मुसलमान समाज में राजनीतिक चेतना जगाई।
आज़ादी सिर्फ़ राजनैतिक हक़ नहीं, इल्म-इंसाफ की जंग भी
मौलाना का मानना था कि “आज़ादी सिर्फ़ राजनैतिक हक़ नहीं, बल्कि इल्म और इंसाफ़ की जंग भी है।”यही वजह थी कि उन्होंने स्कूल-कॉलेज खोलने, लड़कियों की तालीम और समाज में बराबरी का पैग़ाम देने पर ज़ोर दिया। 1840 के दशक के बाद केरल में राष्ट्रवादी चेतना के बीज बोने वालों में उनका नाम अहम माना जाता है।
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ उतरे सड़कों पर
मौलाना ब्रिटिश हुकूमत के दमनकारी क़ानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे, जेल गए। मगर, उनके हौसले पस्त नहीं हुए। आज जब हम भारत के स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हैं, तो मौलाना अब्दुर रहमान जैसे नेताओं का नाम लेना लाज़मी है। ये वो शख़्सियत हैं। जिनका योगदान केरल के इतिहास को नई पहचान देता है, और हमें याद दिलाता है कि आज़ादी की लड़ाई पूरे हिंदुस्तान की साझा विरासत है।
