लखनऊ : यूपी की राजनीति में सोमवार शाम उस समय गर्मी आ गई जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात करने पहुंचे। यह करीब 45 मिनट तक चली बैठक जितनी लंबी रही, उतनी ही रहस्यमयी भी।
“यही खास रही…” — बृजभूषण का जवाब, सवालों से बचाव
मुलाकात के बाद जब मीडिया ने बातचीत के एजेंडे पर सवाल किए, तो बृजभूषण ने सिर्फ इतना कहा कि “मुख्यमंत्री से मुलाकात होनी चाहिए और हुई। यही खास रही।”उनकी अनमनी मुस्कान और टालने वाले जवाब ने सियासी हलकों में चर्चा को और हवा दे दी। जानकार मान रहे हैं कि मुलाकात वैसी नहीं रही जैसी बृजभूषण को अपेक्षा थी।
अखिलेश की तारीफ, सरकार पर सवाल, क्यों बढ़ी दूरी?
पिछले कुछ महीनों में बृजभूषण शरण सिंह ने कई बार सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए, ठेकों में भ्रष्टाचार को लेकर बयान दिए और यहां तक कि अखिलेश यादव को ‘छोटा भाई’ तक कह दिया। यह सब योगी सरकार से बढ़ती दूरी के संकेत थे। यही वजह है कि यह मुलाकात राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ देने वाली मानी जा रही है।
गोरखपुर से देवीपाटन तक, दो वर्चस्व, दो नजरिए
गोरखनाथ मठ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गहरा संबंध गोरखपुर-देवीपाटन क्षेत्र से रहा है। वहीं, देवीपाटन क्षेत्र में बृजभूषण का सामाजिक और राजनीतिक दबदबा लंबे समय से रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय ठेकों पर नियंत्रण, अधिकारियों के ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से मतभेद चले आ रहे हैं, हालांकि सार्वजनिक तौर पर कभी यह सामने नहीं आया।
क्या दूरी कम करने की कोशिश थी ये मुलाकात?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बृजभूषण इस मुलाकात से संदेश देना चाहते थे कि पार्टी और नेतृत्व के साथ उनके संबंध सामान्य हैं, लेकिन मुलाकात के बाद उनका बयान और हावभाव यह भी दिखाते हैं कि संपूर्ण संतुष्टि नहीं मिली।
