हरिद्वार/बड़ौत-बुढ़ाना/लखनऊ: सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। हरियाणा के बहादुरगढ़ जिले से आए दो पोते विशाल और जतिन अपनी 70 वर्षीय दादी राजबाला को पालकी कांवड़ में बिठाकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। पालकी के एक ओर दादी बैठी हैं और दूसरी ओर उतने ही वजन का पवित्र गंगाजल रखा गया है। शिवभक्ति और सेवा की यह अनोखी मिसाल हर किसी को कलयुग के श्रवण कुमार की याद दिला रही है।
दादी बोलीं — भगवान सबको ऐसे पोते दे
पालकी में बैठी राजबाला ने गर्व से कहा कि “मेरे पोते मेरे लिए जो कर रहे हैं। उससे मुझे आत्मिक संतोष मिल रहा है। जब लोग उनकी तारीफ करते हैं, तो मेरा सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। भगवान ऐसे पोते सबको दे।”
हर कदम पर भावनाओं का सफर
विशाल और जतिन ने बताया कि 22 जून को वे अपनी दादी को हरिद्वार लेकर आए, जहां उन्हें हर की पौड़ी पर गंगा स्नान कराया गया और तीर्थ दर्शन कराए गए। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि इस बार भी दादी के साथ कांवड़ यात्रा करेंगे। यह उनका दूसरा साल है, जब वे अपनी दादी को लेकर यात्रा पर निकले हैं।
सेवा, समर्पण और संस्कार
विशाल ने बताया कि उनका पालन-पोषण बचपन से दादी ने ही किया है। “हम आज जो हैं, उन्हीं की वजह से हैं। अब बारी हमारी है — उनकी हर इच्छा पूरी करने की।”
यात्रियों को संदेश, सावधानी रखें, नशे से दूर रहें
विशाल ने दूसरे कांवड़ियों को नशा न करने, सड़क सुरक्षा का ध्यान रखने और शिवभक्ति को सेवा से जोड़ने का संदेश दिया। उनका मानना है कि “भोलेनाथ की भक्ति तभी सच्ची है जब उसमें सेवा और मर्यादा हो।”
23 जुलाई को करेंगे जलाभिषेक
दोनों भाई महाशिवरात्रि के दिन, 23 जुलाई, को बहादुरगढ़ के स्थानीय शिवालय में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। जतिन ने कहा कि“भोलेनाथ की कृपा से यह संकल्प पूरा हो रहा है। यह सिर्फ यात्रा नहीं, एक भावनात्मक तीर्थ है।”
