बलिया /लखनऊ : यूपी के बलिया जनपद के स्वास्थ्य विभाग ने एक समर्पित और लोकप्रिय चिकित्सक डॉ. वेंकटेश मौआर (45 वर्ष) को खो दिया। वे बांसडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अधीक्षक थे और मनियर अस्पताल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। उनके आकस्मिक निधन ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ. मौआर अपने कार्यकाल में पूरी निष्ठा से जनता की सेवा करते रहे और कभी किसी विवाद में नहीं फंसे। उनकी मृत्यु को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है।
रामगोविंद चौधरी ने जताया गहरा शोक, साजिश की आशंका जताई
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने डॉक्टर मौआर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “एक गहरी साजिश का परिणाम” बताया। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य विभाग लोगों की जिंदगी बचाने वाला तंत्र है, लेकिन इस सरकार में खुद डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं हैं। डॉक्टर वेंकटेश जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए।”उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई हो जो नजीर बने।
“सरकार करे जिम्मेदारों पर कार्रवाई” : सपा प्रवक्ता
सपा के जिला उपाध्यक्ष और प्रवक्ता सुशील कुमार पाण्डेय ‘कान्हजी’ ने मृतक डॉक्टर के परिवार को सम्मानजनक नौकरी और मुआवजा दिए जाने की मांग उत्तर प्रदेश सरकार से की है। उन्होंने कहा कि “बलिया के डॉक्टर भय और दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”
सरकार से की अपील
समाजवादी पार्टी समेत क्षेत्र के तमाम लोगों ने राज्य सरकार से अपील की है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिवार को मुआवजा व नौकरी दी जाए। बलिया की स्वास्थ्य व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
