मुरादाबाद : जिला अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक महिला डॉक्टर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करना एक यूट्यूबर युवती को भारी पड़ गया है। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने यूट्यूबर और उसकी सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला अब सोशल मीडिया की सीमाओं और सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
मामला मुरादाबाद जिला अस्पताल का है, जहां ओपीडी में तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आबिदा अपनी नियमित ड्यूटी कर रही थीं। इसी दौरान जुनेरा रफी नाम की एक यूट्यूबर अपनी सहयोगी के साथ अस्पताल पहुंची। आरोप है कि उन्होंने डॉक्टर पर मरीजों को न देखने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान यूट्यूबर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करती रही। बाद में इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट भी कर दिया गया। वायरल वीडियो में डॉक्टर मरीज का परीक्षण करती हुई दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद वीडियो में यह दावा किया गया कि मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल रहा है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और संबंधित तथ्यों की जांच शुरू की। डॉक्टर का कहना है कि वह अपनी निर्धारित ड्यूटी पर मौजूद थीं और मरीजों का उपचार कर रही थीं। ऐसे में बिना अनुमति वीडियो बनाना और भ्रामक तरीके से उसे प्रसारित करना उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
डॉ. आबिदा ने आरोप लगाया कि वीडियो बनाने के दौरान उन्हें डराने, धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की गतिविधियां न केवल डॉक्टरों के कार्य में बाधा उत्पन्न करती हैं बल्कि अन्य मरीजों और कर्मचारियों को भी प्रभावित करती हैं।
इन्हीं आरोपों के आधार पर डॉ. आबिदा ने थाना सिविल लाइन पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत में यूट्यूबर जुनेरा रफी और उनकी सहयोगी नाजिश के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दोनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। वायरल वीडियो, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और चिकित्सकों में भी चर्चा का माहौल है। कई डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान बिना अनुमति वीडियो बनाना और सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी के साथ प्रसारित करना गलत है। इससे डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित होता है और अस्पताल का माहौल भी खराब होता है।
वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग पारदर्शिता की बात कर रहे हैं तो कुछ का मानना है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी या चिकित्सक के खिलाफ आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूरी है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है और सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल मुरादाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब यह जांच ही तय करेगी कि अस्पताल में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में किए गए दावों की सच्चाई क्या है। इस पूरे मामले पर हम लगातार नजर बनाए हुए हैं।
