खाड़ी युद्ध और ईंधन संकट का असर, ट्रांसपोर्ट महंगा, आम आदमी की थाली और जेब दोनों पर चोट
रसोई से बाजार तक महंगाई की मार
बरेली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जिंदगी पर दिखने लगा है। दाल, चावल, तेल से लेकर ड्राईफ्रूट और प्लास्टिक सामान तक हर चीज महंगी हो गई है। पिछले कुछ दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब 5% से लेकर 20% तक का उछाल आया है। जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
दाल-चावल और तेल के बढ़े दाम

बाजार में रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अरहर दाल 130 से 135 रुपये/kg, चना दाल 70 से 75 रुपये, मूंग दाल 110 से 115 रुपये, उड़द दाल 115 से 125 रुपये, मसूर दाल 75 से 80 रुपये,चावल 70 से 80 रुपये/kg, रिफाइंड तेल 150 से 165 रुपये (करीब 15% उछाल), सरसों तेल 145 से 165 रुपये/लीटर है।
ट्रांसपोर्ट महंगा, हर सामान पर असर
व्यापारियों के मुताबिक महंगाई की सबसे बड़ी वजह ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में बढ़ोतरी है। माल ढुलाई में प्रति कुंतल 50 से 70 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी है। इसका सीधा असर दाल, चावल, आटा और तेल जैसे जरूरी सामानों पर पड़ा है
प्लास्टिक, टायल्स और घरेलू सामान भी महंगे
महंगाई सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं रही है। प्लास्टिक सामानों में 25 से 30% तक उछाल है। बाल्टी 110 से 130 रुपये, टब 180 से 200 रुपये, टायल्स की कीमत में 10 से 15 रुपये प्रति पेटी बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण गैस की कमी और फैक्ट्रियों का बंद होना है। कच्चे माल और केमिकल की कीमतों में बढ़ोतरी है।
ईंधन संकट से बढ़ी परेशानी
कई पेट्रोल पंपों पर डीजल का स्टॉक खत्म हो गया है। किसानों और ट्रांसपोर्टरों को भारी दिक्कत है। जिसके चलते नई व्यवस्था की गई है। इसमें पहले भुगतान, फिर सप्लाई की व्यवस्था है। कच्चे तेल की अनिश्चितता से बाजार में अस्थिरता कायम है। कोयला-लकड़ी महंगे होने से ढाबों पर भी खाने के दाम बढ़ने लगे हैं। कॉमर्शियल गैस की किल्लत के चलते कोयला 2800 से 3000 रुपये/क्विंटल, लकड़ी 10 से 14 रुपये/kg, ढाबों और होटलों ने खाने की कीमत 5 से 10 रुपये तक बढ़ा दी है
फल और ड्राईफ्रूट भी महंगे
खाड़ी युद्ध का असर आयातित फलों और ड्राईफ्रूट पर भी पड़ा है। खजूर 250 से 300 रुपये/kg, पिस्ता 3000 रुपये/kg तक, कीवी की सप्लाई प्रभावित है। ईरान और सऊदी अरब से आयात घटने से कीमतों में उछाल है। जिसके चलते बजट बिगड़ा है, और खरीदारी घटी है।
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर
15 दिन पहले जो राशन 5000 रुपये में आता था, अब वही 6200 रुपये तक पहुंच गया है। मासिक बजट में 2500 से 3000 रुपये का इजाफा हुआ है। आय का 10 से 15% हिस्सा महंगाई में जा रहा है। इसलिए ग्राहकों ने आदत को बदला है। वह 5 किलो की जगह 2 किलो दाल खरीद रहे हैं। इसके साथ ही सर्फ, साबुन, टूथपेस्ट भी 5-10% महंगे हुआ है। बाजार में भीड़ है, लेकिन थैले हल्के हो चुके हैं। महंगाई अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही,बल्कि आम आदमी की थाली और जेब दोनों पर सीधा असर डाल रही है।
