नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश को संबोधित किया। यह कार्यक्रम का 129वां एपिसोड था और साल 2025 का आखिरी ‘मन की बात’ भी रहा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि बीते साल में देश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे राष्ट्र को नया आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने कहा कि लोगों से मिल रहे सुझाव और उनके प्रयास इस विश्वास को और मजबूत करते हैं कि ‘विकसित भारत’ का संकल्प जरूर सिद्ध होगा।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को 2026 के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाला वर्ष संकल्प सिद्धि की यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो। उन्होंने सभी नागरिकों और उनके परिवारों के खुशहाल जीवन की कामना की। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ का जिक्र करते हुए लोगों से नियमित व्यायाम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सर्दियों का मौसम व्यायाम के लिए बेहद उपयुक्त होता है, इसलिए सभी को फिट रहने पर ध्यान देना चाहिए।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने मणिपुर के चुराचांदपुर की मारग्रेट रामथरसेम के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प, बांस और लकड़ी से बने उत्पादों को एक बड़े विजन के साथ आगे बढ़ाया। आज उनकी यूनिट में 50 से अधिक कलाकार काम कर रहे हैं और उनके उत्पाद दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसी तरह सेनापति जिले की चोखोने क्रिचेना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक खेती के अनुभव को आगे बढ़ाते हुए फूलों की खेती को अपना जुनून बनाया।
प्रधानमंत्री ने कच्छ के रणोत्सव का भी जिक्र किया, जो 23 नवंबर से 20 फरवरी तक चल रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक दो लाख से ज्यादा लोग इस उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं और विदेशों से भी पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक कलाएं न केवल सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि आर्थिक प्रगति का भी मजबूत माध्यम बन रही हैं। आंध्र प्रदेश के नारसापुरम लेस क्राफ्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इसे GI टैग मिला है और इससे करीब एक लाख महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। ICMR की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से दवाओं की प्रभावशीलता कम हो रही है। अंत में उन्होंने देशवासियों से अपनी विरासत को याद रखने और स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायकों के योगदान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की।
