11 साल बाद भी नहीं बच सके कातिल,शादी के मंडप में हत्या और लेवरी के बहाने किया था कत्ल
बरेली : यूपी के बरेली से न्याय की दो बड़ी और सख्त तस्वीरें सामने आई हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि हत्या जैसे संगीन अपराध करने वाले चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, कानून से बच नहीं सकते। जिले के दो अलग-अलग हत्याकांडों में अदालत ने कुल 6 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि 3.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
शादी के मंडप में हत्या में सात भूमाफियाओं को उम्रकैद
पहला मामला 19 मई 2021 का है। बरेली देहात के थाना शेरगढ़ क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव में शादी का मंडप सजा हुआ था, लेकिन जमीन विवाद की रंजिश में उसी मंडप को खून से रंग दिया गया। गांव के ही दबंग भूमाफियाओं ने सुरेंद्र पाल को चारों ओर से घेरकर धारदार हथियार, हथौड़ा, बेलचा और तलवार से बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
इस सनसनीखेज हत्याकांड की सुनवाई माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तृतीय, बरेली में हुई। लंबी सुनवाई, मजबूत गवाहों और पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने सभी सात अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में कोर्ट से फरार चल रहे रवि और संजीव को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। यहां बुधवार को दोनों को भी उम्रकैद और 55-55 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
अदालत ने की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने सजा के दौरान सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा “कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे आरोपी कितना ही बड़ा भूमाफिया क्यों न हो।” इस केस में जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रीतराम राजपूत की सशक्त पैरवी को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
भूमाफिया नेटवर्क का भी हुआ खुलासा
जांच में सामने आया कि इन अभियुक्तों ने गांव के गरीब लोगों की करीब 125 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। लगभग 3 करोड़ रुपये की जमीन फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम कराई गई थी। प्रशासन ने बाद में जमीन कब्जा मुक्त कराई और करीब 2 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की। साल 2024 में सभी अभियुक्तों को आधिकारिक रूप से भूमाफिया घोषित किया गया था।
11 साल पुराने हत्याकांड में भी इंसाफ
दूसरा मामला शहर के थाना बारादरी क्षेत्र का है, जहां 7 दिसंबर 2014 की रात लेवरी के बहाने युवक रामकिशोर को घर से बुलाकर गोली मार दी गई थी। कुछ देर बाद उसका शव एक ट्रॉली में पड़ा मिला था, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में अदालत ने 10 गवाहों की गवाही के आधार पर बुधवार को फैसला सुनाया। एडीजे-3 कोर्ट ने राम सिंह और सुनील (निवासी सतीपुर, बारादरी),वीरू (निवासी नवदिया झादा, बिथरी चैनपुर),परमानंद (निवासी फरीदापुर, बिथरी चैनपुर) को धारा 302 IPC के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके अलावा धारा 201/34 IPC के तहत सभी दोषियों को 7-7 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी दिया गया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
कोर्ट का साफ संदेश
इन दोनों फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि हत्या चाहे शादी के मंडप में हो या सड़क पर,कानून देर से सही, लेकिन सजा जरूर देता है।
