संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री
बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
हर साल 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पूरी दुनिया में 15 से 24 वर्ष की उम्र के 120 करोड़ युवा हैं। यूनिसेफ के अनुसार, भारत में 15 से 29 वर्ष के करीब 37 करोड़ युवा हैं। जिससे भारत विश्व में युवा शक्ति में नंबर वन है, जबकि चीन 26.9% के साथ दूसरे स्थान पर है। मनोविज्ञान में हर पीढ़ी का एक नामकरण होता है, जो सामाजिक और तकनीकी बदलावों को दर्शाता है।
युवाओं का सकारात्मक इस्तेमाल कम, और दुरुपयोग ज्यादा
जनरेशन Z के मुताबिक 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा,जनरेशन अल्फा यानी 2013 से 2024 के बीच जन्मे बच्चे हैं। जनरेशन Z को बोलचाल में जेन जी कहा जाता है। इनका बचपन और युवावस्था तकनीकी क्रांति और डिजिटल माहौल में बीती है। सूचना का भंडार इनके पास है, लेकिन सर्वे बताते हैं कि इसका सकारात्मक इस्तेमाल कम, और दुरुपयोग ज्यादा हुआ है।
डिजिटल परवरिश और बदलते रिश्ते
बीते 10 वर्षों में बच्चों का पालन -पोषण डिजिटल स्क्रीन के इर्द-गिर्द हो गया है। पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों की जगह अब वर्चुअल कनेक्शन ने ले ली है। विचारों का टकराव माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी बढ़ा रहा है।
जेन जी के गुण और चुनौतियां
रिपोर्ट के मुताबिक, जेन जी में विविधता को अपनाने की क्षमता है। ब्रांडिंग और पर्सनल एक्सप्रेशन को प्राथमिकता देते हैं, और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाने से नहीं कतराते, लेकिन, इन्हें तेज़ी से आगे बढ़ने की चाहत में धैर्य की कमी है। 90% युवा चाहत पूरी न होने पर जल्दी निराश हो जाते हैं। सूचनाओं की भरमार में सही विकल्प चुनना मुश्किल हो रहा है।
रोज़गार और सामाजिक दबाव
शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार पाना युवाओं के लिए बड़ी चुनौती है। बेरोजगारी न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ा रही है। जातिवाद, भ्रष्टाचार और राजनीति में युवाओं का स्वार्थ के लिए इस्तेमाल इनकी ऊर्जा को गलत दिशा में मोड़ रहा है।
युवाओं को सशक्त बनाने की जरूरत
युवाओं की वास्तविक क्षमता का इस्तेमाल तभी होगा, जब उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, योग्यता के अनुसार रोजगार, और सकारात्मक सामाजिक वातावरण मिले, तभी यह विशाल युवा शक्ति भारत को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी बल्कि सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सशक्त करेगी।
