बरेली : यूपी की बरेली नगर निगम ने वार्ड संख्या-1 बिहारीपुर में घटिया गुणवत्ता की सीसी सड़क निर्माण के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेकेदार की फर्म पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार, बिहारीपुर क्षेत्र में सिटी सब्जी मंडी से कमल पान की दुकान तक आरसीसी नाली निर्माण तथा वाल्मीकि मंदिर के सामने चंद्र प्रकाश आर्य के मकान से सुरेंद्र के मकान तक नाली एवं सीसी सड़क निर्माण कार्य के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत 75.98 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे।
एक अगस्त को अनुबंध
नगर निगम द्वारा निविदा स्वीकृत होने के बाद एक अगस्त 2024 को ठेकेदार से अनुबंध किया गया था और कार्य एक फरवरी 2025 तक पूरा किया जाना था। निर्माण कार्य पूर्ण होने का दावा करते हुए अवर अभियंता ने 41.07 लाख रुपये के द्वितीय एवं अंतिम भुगतान का बिल मुख्य अभियंता कार्यालय को भेजा था। हालांकि ल, अंतिम भुगतान से पहले मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
क्षतिग्रस्त मिली सड़क

निरीक्षण के दौरान नवनिर्मित सीसी सड़क की ऊपरी सतह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त मिली। करीब 622.60 वर्गमीटर क्षेत्र में सड़क खराब हालत में पाई गई। जांच में सामने आया कि सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे दोबारा व्हाइट टॉपिंग की आवश्यकता होगी। विभागीय आकलन के अनुसार सड़क की मरम्मत और व्हाइट टॉपिंग पर 2.83 लाख रुपये तथा 50,991 रुपये जीएसटी सहित कुल 3.34 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
पूरी राशि निगम कोष में होगी जमा
नगर निगम ने यह पूरी राशि ठेकेदार फर्म से सरकारी कोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार फर्म के खिलाफ यह पहली शिकायत नहीं है। इससे पहले परसाखेड़ा रोड नंबर-1 और संजयनगर में कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्यों में भी गुणवत्ता संबंधी शिकायतें मिली थीं। उन मामलों में भी फर्म पर आर्थिक दंड लगाया गया था और भविष्य में लापरवाही न करने का लिखित आश्वासन लिया गया था।
अधिकारियों ने जताई नाराजगी
बार-बार शिकायतें मिलने और सरकारी धन की बर्बादी को गंभीर मानते हुए इस बार नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
