लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को अदालत ने उस दिल दहला देने वाले कांड पर अंतिम फैसला सुना दिया। जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। खोपड़ी का सूप पीने वाले नरभक्षी और सीरियल किलर राम निरंजन कोल उर्फ राजा कोलंदर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला साल 2000 में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में आया है, जिसमें उसने दो निर्दोष युवकों की नृशंस हत्या कर उनके सिर काटकर खोपड़ियां संग्रह की थीं।
कौन है राजा कोलंदर?

राजा कोलंदर का असली नाम राम निरंजन कोल है। वह प्रयागराज के शंकरगढ़ का रहने वाला है और नैनी के केंद्रीय आयुध भंडार (सीओडी), छिवकी में कार्यरत था। ब्याज पर पैसा देने के अलावा राजनीति में भी सक्रिय था। उसकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है। लोगों में प्रभाव बढ़ने के बाद उसने खुद को ‘राजा’ कहलवाना शुरू कर दिया। लेकिन इसके पीछे छिपा चेहरा एक ऐसे नरभक्षी सीरियल किलर का था, जिसकी क्रूरता की मिसाल मिलना दुर्लभ है।
2000 का डबल मर्डर केस: कैसे हुआ था रूह कंपा देने वाला कांड?
मामला 24 जनवरी 2000 का है। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास टैक्सी ड्राइवर मनोज कुमार सिंह और उनके साथी रवि श्रीवास्तव छह यात्रियों को लेकर रीवा के लिए निकले थे। उनमें एक महिला भी थी। आखिरी बार दोनों की लोकेशन रायबरेली के हरचंदपुर में एक चाय की दुकान पर मिली थी। इसके बाद दोनों गायब हो गए। तीन दिन तक कोई सुराग न मिलने पर उनके परिजनों ने नाका थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिन बाद प्रयागराज के शंकरगढ़ के जंगलों से दोनों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि उनकी हत्या कर उनके सिर काट लिए गए थे, और खोपड़ी को उबालकर सूप बनाकर पी लिया गया था।
अदालत का फैसला: उम्रकैद और न्याय की प्रतीक्षा का अंत
लखनऊ की एडीजे कोर्ट नंबर-5 के जज रोहित सिंह ने 21 मई 2025 को इस भीषण हत्याकांड पर फैसला सुनाया। अदालत ने राजा कोलंदर और उसके साले बच्छराज कोल को मनोज और रवि की अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार, यह हत्या योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। इस मामले की चार्जशीट 2001 में दाखिल हुई थी, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की वजह से मुकदमे की सुनवाई 2013 में शुरू हो पाई। अब, 25 साल बाद आखिरकार पीड़ित परिवारों को न्याय मिला है।
पहले भी हो चुकी है उम्रकैद, घर से मिली थीं 14 खोपड़ियां
इससे पहले राजा कोलंदर को पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में 2012 में इलाहाबाद कोर्ट उम्रकैद की सजा दे चुकी है। इस मामले में पुलिस ने उसके फार्महाउस से 14 मानव खोपड़ियां बरामद की थीं, जिन पर नाम लिखे हुए थे। पूछताछ में उसने बताया कि यह उन लोगों के नाम हैं जिन्हें उसने मारा और उनके सिर काटकर जमीन में दबा दिया। कोलंदर ने माना था कि वह सिर को पहले खौलते पानी में उबालता था, भेजा निकाल कर सूप बनाकर पीता था। यह सुनकर पुलिस अधिकारी भी कांप उठे थे।
राजनीति, पैसा और नरभक्षण, डरावनी दुनिया का खुलासा
राम निरंजन कोल का जीवन बाहर से एक आम राजनैतिक कार्यकर्ता और संपन्न व्यक्ति जैसा था, लेकिन अंदर ही अंदर वह एक क्रूर नरभक्षी था। वह अपने फार्महाउस पर खोपड़ियों का संग्रह करता, हर हत्या के बाद एक नया नाम जोड़ता। वह मानता था कि इस प्रक्रिया से उसे शक्ति मिलती है।
अब भी कई सवाल बाकी हैं…
राजा कोलंदर की यह कहानी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि कैसे सत्ता, धन और मानसिक विकृति का मेल समाज के लिए एक खतरनाक विस्फोट बन सकता है। क्या वह अकेला था या उसकी मदद करने वाले और भी लोग हैं? क्या यह मामला यहीं खत्म हो गया या और भी हत्याओं का राज दफन है?
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