सिर्फ सहानुभूति नहीं, जिम्मेदारी, समर्थन और जागरूकता का लें संकल्प, एक अदृश्य संघर्ष के नायकों को समर्पित
बरेली : हर साल 8 मई को दुनियाभर में विश्व थैलेसीमिया दिवस (World Thalassemia Day) मनाया जाता है। यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन लाखों ज़िंदगियों की हिम्मत, संघर्ष और जज़्बे का प्रतीक है, जो थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद हार नहीं मानते। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि बीमारी चाहे जैसी भी हो, इंसान की इच्छाशक्ति और समाज की सहभागिता उससे कहीं बड़ी होती है।थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार (genetic blood disorder) है। जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। परिणामस्वरूप शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। इस स्थिति में मरीज को बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। यह बीमारी जीवनभर साथ रहती है, और फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, सिर्फ जागरूकता, समय पर पहचान और प्रबंधन ही इसका विकल्प है।
जानें क्यों मनाया जाता है विश्व थैलेसीमिया दिवस
यह दिन थैलेसीमिया से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को सम्मान देने, समाज में जागरूकता बढ़ाने, और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के संकल्प का प्रतीक है। इस अवसर पर हमारा उद्देश्य होना चाहिए। विवाह से पूर्व थैलेसीमिया जांच को प्रोत्साहित करना चाहिए। मरीजों को मानसिक, सामाजिक और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत है। नीति निर्माताओं को थैलेसीमिया से जुड़ी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं लागू करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। भारत में थैलेसीमिया की स्थिति चिंताजनक है। भारत में यह बीमारी एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। अनुमान के मुताबिक, हर साल 10,000 से अधिक बच्चों का जन्म थैलेसीमिया ग्रस्त स्थिति में होता है। इसके बावजूद, जागरूकता का स्तर बेहद कम है। जहां शहरी क्षेत्रों में कुछ हद तक जागरूकता देखी जाती है, वहीं ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी गहरी अनभिज्ञता व्याप्त है। विवाह पूर्व जीन जांच और थैलेसीमिया स्क्रीनिंग जैसे अहम कदम अब भी व्यापक रूप से लागू नहीं हो पाए हैं।
थैलेसीमिया रोगियों की जिंदगी हर दिन एक चुनौती
थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को हर 15-20 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। इसके साथ ही आयरन की अधिकता से बचने के लिए महंगी दवाओं का सेवन भी ज़रूरी होता है। इसके अलावा निरंतर शारीरिक कमजोरी, मानसिक और भावनात्मक दबाव, सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा। इन सबके बीच भी वे हिम्मत, धैर्य और उम्मीद से भरी जिंदगी जीते हैं। इनके परिवार भी हर दिन इन नायकों के साथ एक अघोषित युद्ध लड़ते हैं।
हमारी यह है ज़िम्मेदारी
थैलेसीमिया से लड़ाई सिर्फ डॉक्टर या परिवारों की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए, हम सब मिलकर ये कदम उठाएं। नियमित रक्तदान करें, क्योंकि थैलेसीमिया मरीजों के लिए यह जीवन रेखा है। विवाह पूर्व जांच को अपनाएं और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करें। सरकार से थैलेसीमिया स्क्रीनिंग को जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल करने की मांग करें। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को सम्मान और बराबरी का हक दें। विश्व थैलेसीमिया दिवस केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि यह एक सामूहिक चेतना और करुणा का संकल्प दिवस है। हम थैलेसीमिया को नहीं, बल्कि उसकी अनदेखी को हराएं। सिर्फ सहानुभूति न दिखाएं, बल्कि सक्रिय सहभागिता की जरूरत है। “थैलेसीमिया से हार नहीं मानते वो, जो जीवन को हर दिन जीतते हैं। आइए, हम उनके साथ खड़े हों।”
