बरेली : उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में शुमार गंगा एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 594 किलोमीटर लंबे इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घघाटन अब 15 अगस्त 2025 को प्रस्तावित है, लेकिन इस सपने को साकार करने से पहले 17 स्थानों पर निर्माण बाधाएं सामने आई हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं समीक्षा कर इनका समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। जिसके चलते प्रशासन सक्रिय मोड में है और यूपीडा के नेतृत्व में तेजी से कार्य हो रहा है। यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी के मेरठ से शुरू होकर पूर्वांचल के प्रयागराज तक जाएगा। इसमें करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। यह प्रोजेक्ट ना केवल यूपी की तस्वीर बदलेगा, बल्कि इसकी तकदीर भी संवारेगा।
17 स्थानों पर चिन्हित बाधाएं, 11 जिलों में अधिग्रहण और निर्माण में अड़चन
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जूडापुर गांव तक जाता है। यह मार्ग 12 जिलों से होकर गुजरता है, लेकिन 11 जिलों में कुल 17 स्थानों पर बड़ी बाधाएं सामने आई हैं। ये बाधाएं भूमि अधिग्रहण, भवन हटाने, पेड़ हटाने और आवश्यक सुविधाओं के विस्थापन से जुड़ी हैं। इसमें मुख्य रूप से मेरठ में इंटरचेंज के निर्माण में एक स्कूल और एक अस्पताल भवन रास्ते में हैं। इन्हें हटाना है। इसी तरह से कुछ जगहों पर भूमि अधिग्रहण अधूरा, कई स्थानों पर बिजली-पानी की लाइनें, पुराने ढांचे, और हरित पट्टियों के पेड़ हटाने की प्रक्रिया बाकी है। यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने सभी 11 जिलों के डीएम को निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी स्तर पर टीमें गठित कर मौके पर समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

तीन महीने में पूरी हो सकती है परियोजना, 15 अगस्त को उद्घघाटन की तैयारी
निर्माण एजेंसियों और राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यदि मौसम अनुकूल रहा, तो अगले तीन महीनों में पूरा एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य समाप्त हो सकता है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस 2025 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका भव्य लोकार्पण संभावित है। इस हाईस्पीड कॉरिडोर के चालू होते ही मेरठ से प्रयागराज का सफर 8-9 घंटे से घटकर महज 6 घंटे में पूरा हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जूडापुर गांव तक जाएगा। रास्ते में यह 12 जिलों यानी मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगा। इसमें कुल 519 गांव सीधे तौर पर जुड़े होंगे।
उन्नाव में सबसे लंबा हिस्सा
गंगा एक्सप्रेस वे उन्नाव में सबसे लंबा होगा। यहां 105 किमी गुजरेगा। इसमें 14 बड़े पुल और 126 छोटे पुल,929 पुलिया, 7 रेलवे ओवरब्रिज (ROB), 28 फ्लाईओवर,आठ डायमंड इंटरचेंज, 17 टोल प्लाजा, 2 मुख्य (मेरठ, प्रयागराज) और 15 रैंप टोल हैं। गंगा नदी पर 1 किमी लंबा पुल और रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबा पुल बनेगा।
अब तक क्या हुआ, क्या बाकी
इस एक्सप्रेस वे से 12 जिलों और 519 गांवों को मिलेगा नया जीवनमार्ग मिलेगा। यात्रा समय और ट्रैफिक में भारी कमी आएगी।लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट को मिलेगा बूस्ट मिलेगा। रोजगार और निवेश के नए अवसर, पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल का सीधा संपर्क
आवारा पशुओं से बचाव के लिए कंक्रीट चारदीवारी
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर कंक्रीट की चारदीवारी बनाई जा रही है ताकि आवारा पशु एक्सप्रेसवे पर न घुस सकें और हादसों से बचाव हो सके। परियोजना को 20 नवंबर,2022 को पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति मिल गई थी। राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने क्लियरेंस दे दिया है। जिससे निर्माण कार्य में अब कोई रुकावट नहीं है।
जनता की नजर अब उद्घघाटन पर
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की ड्रीम परियोजनाओं में गिना जा रहा है। ऐसे में इसके निर्धारित समय से पहले उद्घाटन को लेकर प्रशासन, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की उत्सुकता चरम पर है। अब देखना होगा कि प्रशासन बची हुई 17 बाधाओं को कितनी तेजी से हटाकर इस ऐतिहासिक परियोजना को तय समय पर लॉन्च करने में सफल हो पाता है।
निर्माण का जिम्मा अडानी और आईआरबी को
गंगा एक्सप्रेसवे को चार हिस्सों में बांटा गया है। इसमें ग्रुप ए में मेरठ से अमरोहा तक 129 किमी है। इसका ठेका आईआरबी (IRB) इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला है। इसकी लागत 1782 करोड़, ग्रुप बी में हरदोई से बदायूं तक 151 किमी है। यह ठेका अदाणी ग्रुप को 1950 करोड़ रुपयों में मिला है। ग्रुप सी में हरदोई से उन्नाव) 155 किमी भी अदानी को 2197 करोड़ और ग्रुप डी में उन्नाव से प्रयागराज 156 किमी है। इसका ठेका अदाणी ग्रुप को है। इसकी लागत 2099 करोड़ रुपये है।
रफ्तार भी दमदार, 120 किमी प्रतिघंटा अधिकतम गति
गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किमी/घंटा तय की गई है। इससे यूपी में तेज, सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर कंक्रीट की चारदीवारी बनाई जा रही है। जिससे आवारा पशु एक्सप्रेसवे पर न घुस सकें और हादसों से बचाव हो सके।
