कर्मचारी नेता संजीव मेहरोत्रा ने देशव्यापी हड़ताल की सफलता को शुरू की बैठकें, जानें तैयारियां
बरेली : देश की आर्थिक और श्रमिक नीतियों के विरोध में 20 मई 2025 को एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल का नेतृत्व केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र फेडरेशनों द्वारा किया जा रहा है। इस हड़ताल को विभिन्न बैंक, बीमा, औद्योगिक, राज्य कर्मचारी, और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। कर्मचारी नेता संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पीछे केंद्र सरकार की शोषणकारी और दमनकारी आर्थिक नीतियों, तेजी से हो रहे निजीकरण, और श्रमिक अधिकारों में कटौती के विरोध की भावना है। प्रमुख रूप से 100 फीसद विदेशी निवेश के खिलाफ बीमा क्षेत्र की रक्षा, एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, चारों लेबर कोड (लेबर संहिताओं) को वापस लेना, बैंक, बीमा, आम बीमा और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में खाली पदों को भरना, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर प्रभावी रोक, संविदा और ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति, स्थायी पदों पर स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति आदि मुद्दे हैं।
बरेली से बेंगलुरु तक गरजेंगे कर्मचारी
बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री एवं वरिष्ठ कर्मचारी नेता संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि, “इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए श्रमिक संगठनों ने रणनीतिक रूप से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बरेली से लेकर बेंगलुरु तक कर्मचारी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।”बैंक बीमा आम बीमा राज्य कर्मचारी महासंघ के आंतरिक परिपत्रों से यह संकेत मिला है कि हड़ताल व्यापक और प्रभावी रहेगी।
किन-किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?
इस हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं,सरकारी और कुछ निजी बैंकों में कामकाज प्रभावित रहेगा, बीमा कंपनियों में पॉलिसी जारी करने और दावों के निपटारे में देरी हो सकती है, कारखानों और उत्पादन इकाइयों में ठप या धीमा कार्य,कर्मचारियों की भागीदारी से फाइलों की गति रुकेंगी। शिक्षा और परिवहन सेवाओं के साथ क्षेत्रीय संगठन निर्णय के अनुसार आंशिक प्रभाव पड़ेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी लामबंदी
भारतीय मजदूर संघ (BMS), भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU), अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) जैसे प्रमुख संगठन शामिल होंगे। कई राज्यों में यूनियन मीटिंग्स, प्रदर्शन और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। हड़ताल के दिन जिला मुख्यालयों पर रैलियां और धरना प्रदर्शन प्रस्तावित है। हालांकि, अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस देशव्यापी हड़ताल पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार कुछ विभागों ने हड़ताल को विफल करने के लिए आवश्यक सेवाओं में कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है।
