बरेली : इस्लामी दुनिया के मशहूर बुज़ुर्ग और बरेलवी मुसलमानों के मजहबी रहनुमा हज़रत ताजुश्शरिया मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान (अजहरी मियां) के सातवें दो रोज़ा उर्स- ए-मुबारक का आगाज़ आज पारंपरिक परचम कुशाई की रस्म के साथ दरगाह-ए-ताजुश्शरिया पर हुआ। लाखों की संख्या में देश-विदेश से आए अकीदतमंदों ने शिरकत की।
परचम कुशाई की रस्म और जुलूस की रस्म अदा

सुबह नमाज़-ए-फज्र के बाद दरगाह ताजुश्शरिया में कुरानख़ानी और नात-ओ-मनक़बत की महफ़िल से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन ख़ान (फरमान मियां) की क़यादत में परचमी जुलूस शाहबाद स्थित मिलन शादी हाल से निकाला गया, जो क़दीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह ताजुश्शरिया पहुँचा। वहाँ सज्जादानशीन व क़ाज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ़्ती असजद रज़ा ख़ान क़ादरी ने परचम कुशाई की रस्म अदा की और मुल्क में अमन, चैन और भाईचारे के लिए ख़ास दुआ की।
तीन स्थानों से परचमी जुलूस निकले

दिन में कुल तीन परचमी जुलूस निकाले गए। इसमें पहला जुलूस शाहबाद से सैय्यद कैफ़ी अली के निवास से, दूसरा आज़मनगर से मोहम्मद साजिद की क़यादत में, तीसरा जुलूस सैलानी क्षेत्र से समरान ख़ान के नेतृत्व में यह जुलूस कुतुबखाना, घंटाघर, बिहारीपुर ढाल होते हुए दरगाह पहुंचे। रास्ते में लोगों ने जगह-जगह फूलों की वर्षा कर अकीदत के साथ इस्तक़बाल किया।
मुफ़्ती असजद मियां ने दिया पैग़ाम
उर्स के मौके पर मुफ़्ती असजद मियां की ओर से एक अहम पैग़ाम दिया गया। जिसमें कहा गया कि आज के दौर में मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को इस्लाम के बुनियादी अकीदे व मसाइल की तालीम दें। उन्होंने कहा, “बच्चे सादा कागज़ की तरह होते हैं। उनके दिलों में वही बातें उतारें, जो उनकी दुनिया और आख़िरत दोनों के लिए फायदे मंद हों।” उन्होंने बेटा-बेटी में फ़र्क़ खत्म करने, समय पर निकाह करने और फिजूलखर्ची से बचने की नसीहत दी। साथ ही आपसी सुन्नी खानकाही इत्तेहाद पर ज़ोर देते हुए मज़हबी एकता का पैग़ाम दिया।
शाम को महफ़िल-ए-मिलाद और उलेमा की तकरीरें
रात में महफ़िल-ए-मिलाद और उलेमा की तकरीरें आयोजित हुईं, जिसमें देश-विदेश से आए इस्लामी स्कॉलर और मुरीद शामिल हुए। ताजुश्शरिया के इल्मी और रूहानी किरदार को याद किया गया।
कल का उर्स कार्यक्रम
5 मई (सोमवार) को सुबह 07:10 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म जिलानी मियां के कुल की रस्म, दोपहर: जामियातुर रज़ा, सीबीगंज में देश-विदेश के उलेमा की तकरीर, शाम 07:14 बजे अजहरी मियां हज़रत ताजुश्शरिया का कुल शरीफ होगा। इसके साथ ही दो रोज़ा उर्स-ए-ताजुश्शरिया का समापन होगा।
इन लोगों ने संभाली व्यवस्था
उर्स के दौरान मोईन ख़ान, समरान ख़ान, अब्दुल्ला रज़ा ख़ान, मौलाना शम्स, हाफिज इकराम रज़ा, शमीम अहमद, ज़हीर अहमद, कैफ़ी अली, रहबर रज़ा, शाहबाज़ ख़ान, जीशान रज़ा, ईशान फ़रीदी और अन्य कार्यकर्ता दिन-रात व्यवस्था में जुटे हैं।
