लखनऊ/संभल : बाल विकास परियोजना कार्यालय (सीडीपीओ) में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। मानदेय के एरियर की फाइल पास करने के एवज में 7,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए प्रभारी मुख्य सेविका मालती को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान मालती ने खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की, लेकिन टीम के पास मौजूद पुख्ता सबूतों के सामने वह गिड़गिड़ाने लगी।
क्या है पूरा मामला?
संभल के गांव केशोपुर रसेटा निवासी एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका मानदेय एरियर कार्यालय में रुका हुआ है। जब वह इसकी जानकारी लेने कार्यालय पहुंची, तो प्रभारी मुख्य सेविका मालती ने कार्य में सुविधा देने के बदले 7,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़िता ने यह बात एंटी करप्शन टीम को बताई। टीम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही मालती ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, मौके पर उसे दबोच लिया गया।
गिरफ्तारी के वक्त गिड़गिड़ाई आरोपी
गिरफ्तारी के वक्त मालती ने खुद को निर्दोष बताते हुए गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया। लेकिन टीम के पास रकम की गिनती, वीडियो रिकॉर्डिंग और शिकायतकर्ता के बयान समेत तमाम साक्ष्य मौजूद थे। उसे कोतवाली लाकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
टीम प्रभारी का बयान
टीम प्रभारी सुखबीर सिंह भदौरिया ने बताया कि, “शिकायत सत्य पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। आरोपी को मौके से रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया है। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर कोतवाली पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।”
जांच में खुल सकते हैं और भी राज
सूत्रों की मानें तो बाल विकास कार्यालय में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। अब इस कार्रवाई के बाद अन्य कर्मचारियों के कार्यों की भी जांच की जाएगी। क्या यह भ्रष्टाचार का एक अकेला मामला है या इसके पीछे एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था?।इस पर भी अब जांच एजेंसियों की नजर है।
