लखनऊ/प्रयागराज : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में दाखिल एक नई याचिका को अदालत ने बुधवार को खारिज कर दिया है। याचिका कर्नाटक निवासी याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई थी। जिसमें उन्होंने “नए साक्ष्य” प्रस्तुत करने का दावा किया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसी तरह की याचिका 5 मई को पहले ही निपटाई जा चुकी है। अतः अब याचिकाकर्ता के पास समीक्षा याचिका दायर करने का विकल्प शेष है।
क्या थी याचिका में मांग?
याचिकाकर्ता शिशिर ने दावा किया कि उनके पास राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले कुछ नए साक्ष्य हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जब तक इस याचिका पर पूरी तरह से सुनवाई न हो जाए, तब तक राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता की यह भी मांग थी कि न्यायालय इस मामले की तत्काल सुनवाई कर निर्णय दे।
अदालत का क्या रहा रुख?
न्यायमूर्ति संजय कृष्ण त्रिपाठी की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले भी याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया था और 5 मई 2025 को उस याचिका का विधिवत निपटारा कर दिया गया था। चूंकि, उस याचिका में भी नागरिकता से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को आधार बनाया गया था, इसलिए यह नई याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
याचिकाकर्ता को मिला कानूनी विकल्प
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को पहले आदेश पर कोई आपत्ति है, तो वह समीक्षा याचिका (Review Petition) दायर कर सकते हैं। यह एक वैधानिक और न्यायसंगत प्रक्रिया है जो पहले दिए गए न्यायिक आदेशों के पुनर्विचार का मार्ग देती है।
अदालत ने कहा, “पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं”
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एक जैसे तथ्यों के आधार पर बार-बार याचिकाएं दाखिल करना न्यायिक समय और संसाधनों की बर्बादी है। अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि यह मामला अब समीक्षा के लिए ही योग्य है, न कि दोबारा सुनवाई के लिए।
