देश और मजहब की निभाएं जिम्मेदारी
बरेली : दरगाह आला हज़रत, बरेली से जुड़े जामिआ रज़विया मंज़र-ए-इस्लाम के उलमा और मुफ्तियाने कराम की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इसमें मौजूदा हालात को देखकर एक अहम बयान जारी किया गया। इस बैठक में देश की सुरक्षा, मजहबी गुमराही, सोशल मीडिया के खतरे और मुस्लिम युवाओं की जिम्मेदारियों को लेकर गहराई से चर्चा हुई। बैठक के बाद दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियाँ) और सज्जादानशीन हज़रत मुफ्ती अहसन मियाँ के हवाले से जारी बयान में खास तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बने तनावपूर्ण हालात में मुस्लिम युवाओं को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
‘सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से जुड़ी सामग्री साझा करना हो सकता है कानूनी अपराध’
दरगाह से जुड़े प्रवक्ता नासिर कुरैशी ने जानकारी दी कि बैठक में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग पाकिस्तान समर्थित वीडियो, पोस्ट, ऑडियो और धार्मिक बयानों को फैला रहे हैं। यह न केवल देश के कानून के खिलाफ है, बल्कि मजहब और मसलक के भी खिलाफ है। जंग जैसे हालात में किसी ‘दुश्मन देश’ की सामग्री को बढ़ावा देना एक गंभीर कानूनी अपराध है। जिसकी सजा कड़ी हो सकती है। उलमा ने आगाह किया कि ऐसी किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले कई बार सोचें, क्योंकि यह न केवल आपकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि आपके पूरे परिवार को कानूनी पचड़े में डाल सकता है।
मुल्क से मोहब्बत हमारी मजहबी और संवैधानिक जिम्मेदारी: मुफ्ती सलीम नूरी
मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने अपने बयान में साफ कहा, “मुल्क से मोहब्बत और वफादारी हमारी मजहबी और संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस्लाम कभी भी ऐसे रवैये की इजाजत नहीं देता, जो मुल्क के खिलाफ हो।” उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी मौलवियों द्वारा फैलाई जा रही गुमराहकुन इस्लामी सामग्री से मुस्लिम नौजवानों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। ये लोग न सिर्फ मजहब के नाम पर फितना फैला रहे हैं, बल्कि मसलक-ए-आला हज़रत के खिलाफ बातें फैला रहे हैं।
‘खतरनाक हथियार बन चुका है सोशल मीडिया, सतर्क रहें’
मौलाना अख्तर ने कहा, “आज सोशल मीडिया एक खतरनाक हथियार बन गया है, खासतौर से उन नौजवानों के हाथ में जो कम पढ़े-लिखे हैं। वे धार्मिक नाम या इस्लामी टर्म देखकर किसी भी सामग्री को बिना जांचे-परखे शेयर कर देते हैं। यह नासमझी उन्हें और उनके समाज को नुकसान पहुंचा सकती है।”मुफ्ती जमील खान ने भी कहा कि नौजवानों को समझना होगा कि मजहबी पोस्ट की आड़ में कैसे कुछ ताकतें गुमराह करने का काम कर रही हैं। इस दौरान मुफ्ती मोहम्मद मोईन, मुफ्ती मुजीब आलम, मौलाना कलीमुर्रहमान, मौलाना अख्तर, मुफ्ती जमील खान, नासिर कुरैशी (प्रवक्ता) आदि मौजूद थे।
